गोड्डा। गोड्डा जिले के महागामा थाना क्षेत्र में ज्वेलरी दुकानों में हुई चोरी की घटनाओं का पुलिस ने सफलतापूर्वक खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी के चांदी के आभूषण, तीन मोबाइल फोन तथा वारदात में प्रयुक्त एक मोटरसाइकिल भी बरामद की है।
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, महागामा के नेतृत्व में महागामा थाना कांड संख्या 33/26 की जांच के दौरान मानवीय एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सबसे पहले छोटू कुमार (निवासी सन्हौला, भागलपुर) को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
छोटू कुमार की निशानदेही पर पुलिस ने मो. मोकर्रम, जिया उर्फ जियाउर्रहमान और सूरज कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान सभी आरोपियों ने महागामा कांड के अलावा हनवारा थाना क्षेत्र की दो ज्वेलरी दुकानों में चोरी की वारदात में भी अपनी संलिप्तता स्वीकार की।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर एक चांदी का ब्रेसलेट, एक चांदी की गले की चेन, तीन मोबाइल फोन और वारदात में प्रयुक्त एक मोटरसाइकिल बरामद की है।
गिरफ्तार सभी आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत न्यायालय में प्रस्तुत किया जा रहा है।
इस कार्रवाई में महागामा एवं हनवारा थाना की संयुक्त पुलिस टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की जांच जारी है और चोरी की अन्य घटनाओं में भी आरोपियों की संलिप्तता की जांच की जा रही है।
रांची : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में गुरुवार को मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की बैठक संपन्न हुई। बैठक में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 79 कैदियों की रिहाई से जुड़े मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई। गहन समीक्षा के बाद 26 कैदियों की रिहाई पर सहमति बनी।
बैठक में राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद द्वारा अनुशंसित 37 नए मामलों के साथ-साथ पिछली बैठकों में अस्वीकृत 42 मामलों पर भी विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ पात्रता, जेल में आचरण, सजा की अवधि, कानूनी प्रावधान, न्यायालय की टिप्पणियां, संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक, जेल अधीक्षक एवं प्रोबेशन पदाधिकारियों की रिपोर्ट सहित सभी पहलुओं की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी प्रमंडलों में ओपन जेल स्थापित करने के लिए भूमि चिन्हित कर प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जेल से रिहा होने वाले व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है और उनके पुनर्वास तथा सम्मानजनक जीवन-यापन के लिए हरसंभव सहयोग सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार न्याय व्यवस्था के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं और सुधारात्मक दृष्टिकोण को भी समान महत्व दे रही है। उन्होंने मानसिक रूप से बीमार बंदियों का डाटाबेस तैयार कर उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाने का भी निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून और नियमों के अनुरूप रिहा हुए व्यक्तियों को समाज में नई शुरुआत का अवसर मिलना चाहिए, जिससे उनके पुनर्वास के साथ-साथ सामाजिक समरसता भी मजबूत होगी।
बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, डीजीपी तदाशा मिश्रा, प्रधान सचिव-सह-विधि परामर्शी नीरज कुमार श्रीवास्तव, महानिरीक्षक कारा एवं सुधारात्मक सेवाएं सुदर्शन प्रसाद मंडल, न्यायिक आयुक्त अनिल कुमार मिश्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
रांची : सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) ने मानव संसाधन प्रबंधन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए मानव संसाधन (HR) अधिकारियों के लिए "मानव संसाधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका" विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस प्रशिक्षण में सीसीएल के विभिन्न क्षेत्रों और मुख्यालय से लगभग 50 मानव संसाधन अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन सीसीएल के निदेशक (तकनीकी/संचालन) सी.एस. तिवारी ने किया। इस अवसर पर कार्यक्रम के संकाय देशबंधु मिश्रा तथा महाप्रबंधक (एचआरडी) एम.एफ. हक भी उपस्थित रहे।
महाप्रबंधक (एचआरडी) एम.एफ. हक ने अपने संबोधन में कहा कि आज के बदलते कार्य परिवेश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली उपकरण बन चुकी है। उन्होंने कहा कि मानव संसाधन अधिकारियों के लिए AI की कार्यप्रणाली को समझना और उसके प्रभावी उपयोग के लिए स्वयं को तैयार करना समय की आवश्यकता है।
वहीं, निदेशक (तकनीकी/संचालन) सी.एस. तिवारी ने कहा कि AI तकनीक मानव संसाधन प्रबंधन को अधिक दक्ष, तेज और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि AI के उपयोग के साथ जुड़े नैतिक पहलुओं, संभावित चुनौतियों और ग्रे-एरिया पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है, ताकि इसका उपयोग जिम्मेदारी और संतुलन के साथ किया जा सके।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने AI के विभिन्न आयामों, मानव संसाधन प्रबंधन में इसके व्यावहारिक उपयोग और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में शामिल अधिकारियों ने भी सक्रिय भागीदारी करते हुए अपने अनुभव, सुझाव और जिज्ञासाएं साझा कीं। सीसीएल का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम डिजिटल युग में मानव संसाधन प्रबंधन को तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
रांची: झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने आज रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में राज्य स्तरीय झारखंड इनक्यूबेटर प्रोग्राम का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने झारखंड इनक्यूबेटर प्रोग्राम की आधिकारिक वेबसाइट और ठाकुर गंगटी मँडरो सखी सिल्क हैंडलूम वीवर्स की वेबसाइट का भी लोकार्पण किया।
इस अवसर पर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि अब तक झारखंड की पहचान मुख्य रूप से खनिज संपदा के लिए होती रही है, लेकिन राज्य की महिलाओं ने अपनी मेहनत, कौशल और आत्मविश्वास के बल पर यह साबित किया है कि वे सफल उद्यमी बनने की क्षमता रखती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य इन महिलाओं की प्रतिभा को पहचान दिलाना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है।उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल 150 उद्यमों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका उद्देश्य पूरे राज्य में महिला उद्यमिता का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की योजना आने वाले समय में और अधिक नॉलेज पार्टनर्स को जोड़कर इस पहल का विस्तार करने की है, ताकि JSLPS से जुड़े 1.54 लाख से अधिक उद्यमों को चरणबद्ध तरीके से बेहतर बाजार, तकनीक, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया जा सके।
मंत्री ने कहा कि "हमारा राज्य अभी केवल 25 वर्ष पुराना है। लंबे समय तक हमने बुनियादी आवश्यकताओं और विकास की चुनौतियों का सामना किया है। अब समय आ गया है कि झारखंड केवल खनिजों के लिए नहीं, बल्कि अपने नवाचार, महिला उद्यमिता और सफल ग्रामीण एंटरप्राइजेज के लिए भी देशभर में पहचाना जाए।" उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य में 10,000 से अधिक ऐसे उद्यम हैं जो उपलब्ध संसाधनों के साथ उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। इन्हीं महिलाओं के प्रयासों से पलाश और आजीविका जैसे ब्रांड राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। सरकार इन सफल मॉडलों को और सशक्त बनाकर राज्य में लाखों महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ना चाहती है।
दीपिका पांडेय सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि IIM कोलकाता इनोवेशन पार्क के तकनीकी सहयोग, JSLPS के मजबूत नेटवर्क तथा राज्य सरकार की प्रतिबद्धता से झारखंड महिला-नेतृत्व वाली ग्रामीण उद्यमिता और नवाचार के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी अलग पहचान बनाएगा।
झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और IIM कलकत्ता इनोवेशन पार्क (IIMCIP) के सहयोग से संचालित यह तीन वर्षीय राज्यव्यापी कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा संचालित सूक्ष्म एवं नैनो उद्यमों को पहचान, प्रशिक्षण, मेंटोरिंग, वित्तीय सहायता, बाजार से जुड़ाव, ब्रांडिंग तथा औपचारिक स्वरूप प्रदान कर उन्हें प्रतिस्पर्धी एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम के प्रथम चरण में 150 महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों का चयन कर उन्हें तीन वर्षों तक व्यापक इनक्यूबेशन सहायता प्रदान की जाएगी। इसमें व्यवसाय का मूल्यांकन, मेंटोरिंग, क्षमता निर्माण, प्रमाणन, वित्तीय एवं बाजार से जुड़ाव, डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स, ब्रांडिंग और व्यवसाय विस्तार जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। कार्यक्रम के तहत रांची में एक केंद्रीय हब तथा संभागीय स्तर पर पाँच क्षेत्रीय स्पोक स्थापित किए जाएंगे, जिससे पूरे राज्य में उद्यमियों तक अंतिम छोर (Last Mile) तक गुणवत्तापूर्ण सहायता पहुंचाई जा सके। इस मौके पर विभागीय सचिव मनोज कुमार, जेएसएलपीएस सीईओ अनन्य मित्तल, झारक्राफ्ट एमडी गरिमा सिंह, अटल इनोवेशन मिशन के डायरेक्टर हिमांशु जोशी सहित विभागीय अधिकारी और महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं मौजूद रही.
सखी सिल्क को लेकर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा*
हमने सखी सिल्क का वेब पोर्टल लॉन्च किया है। इसके माध्यम से ठाकुरगंगटी के भगैया सिल्क बुनकरों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हमारी दीदियों को एक मजबूत प्लेटफॉर्म मिलेगा। एफपीओ के माध्यम से उनके उत्पाद लिए जाएंगे, उनकी ब्रांडिंग सखी सिल्क के तहत की जाएगी और उन्हें पलाश एवं अदिवा स्टोर्स के माध्यम से भी बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। यह हमारे लिए लंबे समय से एक सपना था कि झारखंड के सिल्क को उसकी वास्तविक पहचान मिले। अब तक भगैया सिल्क को लोग भागलपुर सिल्क के नाम से जानते थे, जबकि इसके असली बुनकर गोड्डा और दुमका के विभिन्न प्रखंडों में हैं। जीआई टैग मिलने के बाद अब इन बुनकरों और हमारी महिला दीदियों को उनकी मेहनत का उचित सम्मान और पहचान मिलेगी।मुझे पूरा विश्वास है कि यह पहल न केवल भगैया सिल्क को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाएगी, बल्कि हमारे बुनकर परिवारों और महिला उद्यमियों की आय बढ़ाने के साथ-साथ झारखंड की पारंपरिक हस्तशिल्प विरासत को भी नई पहचान दिलाएगी।
रांची, 28 जुलाई। रांची पुलिस ने जुलाई माह में हुई हाई-प्रोफाइल चोरी की घटना के उद्भेदन में एक और बड़ी सफलता हासिल की है। तकनीकी साक्ष्यों और लगातार की गई वैज्ञानिक जांच के आधार पर पुलिस ने चोरी के मामले में गिरफ्तार सोना व्यवसायी समीर खान उर्फ कबीर खान की निशानदेही पर बिहार के मुजफ्फरपुर से करीब 400 ग्राम सोने एवं मोती के आभूषण बरामद किए हैं। बरामद आभूषणों की अनुमानित बाजार कीमत करीब 65 लाख रुपये बताई गई है। इस कार्रवाई के बाद इस कांड में अब तक 1 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की नकदी और आभूषण बरामद किए जा चुके हैं।
वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 9 जुलाई 2026 को अरगोड़ा थाना क्षेत्र के अशोक नगर निवासी निशित केसरी एवं अखिलेश पांडेय के घरों में चोरी की बड़ी घटना हुई थी। मामले में अरगोड़ा थाना कांड संख्या 172/26 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए रांची पुलिस ने तत्काल एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी ने घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी इनपुट के आधार पर अपराधियों की पहचान की दिशा में तेजी से कार्रवाई शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने पहले घटना में प्रयुक्त जगुआर कार (UP78EM0101) को जब्त किया। साथ ही चोरी की गई ₹17,36,200 नकद राशि और कई सोने के आभूषण भी बरामद किए गए। इसके बाद जांच की कड़ी आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने सोना व्यवसायी समीर खान उर्फ कबीर खान को गिरफ्तार किया।
पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस की टीम ने बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित आरोपी की ससुराल बिजय स्टोर गली, वार्ड संख्या-40, नगर थाना क्षेत्र में छापेमारी की। वहां से करीब 400 ग्राम सोने एवं मोती के आभूषण बरामद किए गए, जिनकी बाजार कीमत लगभग 65 लाख रुपये आंकी गई है।
पुलिस के अनुसार, अब तक इस चोरी कांड में एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति बरामद की जा चुकी है। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी के सामान की खरीद-फरोख्त में और कौन-कौन लोग शामिल थे। इस मामले में आगे भी कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान समीर खान उर्फ कबीर खान, पिता स्वर्गीय अब्दुल्लाह खान, निवासी शुक्ला रोड, रमना, नगर थाना, जिला मुजफ्फरपुर (बिहार) के रूप में हुई है।
इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व सहायक पुलिस अधीक्षक (कोतवाली) निखिल राय और वरीय पुलिस उपाधीक्षक (हटिया) नीरज कुमार ने किया। छापेमारी दल में अरगोड़ा, डेली मार्केट, नामकुम, पुंदाग, तुपुदाना, गोंदा, बुंडू, लोअर बाजार, कोतवाली, बरियातु और जगन्नाथपुर सहित विभिन्न थाना क्षेत्रों के थाना प्रभारी एवं पुलिस पदाधिकारी शामिल रहे।
रांची पुलिस ने कहा है कि अनुसंधान अभी जारी है। चोरी के नेटवर्क, बरामद आभूषणों के स्रोत तथा इस अपराध से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे भी महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां और बरामदगी हो सकती है।
रांची । सरना भवन, नगड़ाटोली, राँची में प्रस्तावित उलगुलान पदयात्रा को सफल बनाने हेतु एक महत्वपूर्ण तैयारी बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों, ग्राम सभा प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों एवं ग्रामीणों ने भाग लिया।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि उलगुलान पदयात्रा दिनांक 05 अगस्त 2026 को भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली, उलिहातू (जिला–खूँटी) से प्रारंभ होगी तथा 08 अगस्त 2026 को भगवान बिरसा मुंडा के समाधि स्थल, कोकर (राँची) में संपन्न होगी।
यह पदयात्रा जल, जंगल, जमीन, आदिवासी अस्मिता, संवैधानिक अधिकारों, पाँचवीं अनुसूची, PESA Act, CNT/SPT Act के प्रभावी क्रियान्वयन तथा आदिवासी भूमि, प्राकृतिक संसाधनों एवं पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है।
बैठक में राँची के नगड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित RIMS-2 निर्माण से संबंधित मुद्दे पर भी गंभीर चर्चा की गई। उपस्थित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि भूमि अधिग्रहण एवं निर्माण कार्य के संबंध में उनकी आपत्तियों का समुचित समाधान नहीं किया गया तथा प्रभावित परिवारों के अधिकारों की अनदेखी करते हुए निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।
बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के प्रावधानों, विशेषकर सामाजिक प्रभाव आकलन, प्रभावित परिवारों की सुनवाई, उचित मुआवज़ा एवं पुनर्वास संबंधी प्रावधानों का समुचित पालन नहीं किया गया। साथ ही अनुसूचित क्षेत्रों में सादा पट्टा, अवैध बंदोबस्ती, अवैध जमाबंदी तथा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आदिवासी भूमि के हस्तांतरण पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
बैठक में सर्वसम्मति से मांग की गई कि RIMS-2 परियोजना से संबंधित भूमि अधिग्रहण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही सादा पट्टा, अवैध बंदोबस्ती, अवैध जमाबंदी एवं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किए गए भूमि हस्तांतरण की राज्यव्यापी जांच कर दोषी व्यक्तियों एवं अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। जब तक सभी विवादों का न्यायसंगत एवं विधिसम्मत समाधान नहीं हो जाता तथा लागू संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए।
बैठक में यह भी मांग की गई कि झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री श्री इरफान अंसारी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दें। साथ ही सरकार से आग्रह किया गया कि प्रभावित ग्रामीणों के साथ तत्काल वार्ता कर उनकी शिकायतों का न्यायपूर्ण एवं विधिसम्मत समाधान सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में झारखंड के सभी ग्राम सभाओं, सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों से उलगुलान पदयात्रा में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर इसे सफल बनाने तथा जल, जंगल, जमीन और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के इस जनआंदोलन को मजबूत करने की अपील की गई।
बैठक में प्रमुख रूप से समाजसेवी एवं बुद्धिजीवियों में निरंजना टोप्पो, अजय उराँव, पूरन चन्द्र मुंडा (तमाड़), आशुतोष सिंह चेरो (पलामू), प्रदीप टोप्पो (सिमडेगा), बुद्धिजीवी श्री पी. सी. मुर्मू, राजेश लिंडा, राकेश बड़ाईक, बहा लिंडा, सविता कच्छप, मनोज केरकेट्टा, मंगला कुल्लू, शीला टोप्पो तथा आनंद टोप्पो उपस्थित रहे एवं अपने विचार व्यक्त किए।
पदयात्रा कार्यक्रम
- प्रारंभ: 05 अगस्त 2026
- प्रारंभ स्थल: भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली, उलिहातू (जिला–खूँटी)
- समापन: 08 अगस्त 2026
- समापन स्थल: भगवान बिरसा मुंडा का समाधि स्थल, कोकर (राँची)
रांची। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की 37वीं कॉर्पोरेट स्तरीय त्रिपक्षीय सुरक्षा समिति (Corporate-Level Tripartite Safety Committee) की बैठक आज यानी 28 जुलाई, 2026 को रांची में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। बैठक में डीजीएमएस, सीसीएल प्रबंधन तथा सीसीएल सेफ्टी बोर्ड के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की। बैठक की अध्यक्षता सीसीएल, सीएमडी निलेंदु कुमार सिंह ने की।
बैठक के दौरान सीसीएल के सुरक्षा मानकों एवं उसके अनुपालन की विस्तृत समीक्षा की गई। साथ ही, पिछली Tripartite Safety Committee Meeting में दिए गए सुझावों एवं अनुशंसाओं के अनुपालन की प्रगति पर विचार-विमर्श किया गया। इसके अतिरिक्त कार्यस्थल सुरक्षा, व्यावसायिक स्वास्थ्य (Occupational Health), वैधानिक अनुपालन (Statutory Compliance) तथा खदान कर्मियों के कल्याण को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण पहलों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत आर. टी. मंडेकर, DDG, CZ ने डी.जी.एम.एस., सीसीएल के निदेशकगण सह अधिकारियों एवं सेफ्टी बोर्ड सदस्यों के साथ दीप प्रज्ज्वलन कर किया। तत्पश्चात सभी डीजीएमएस के अधिकारियों एवं सेफ्टी बोर्ड के सदस्यों को शॉल एवं पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया।
बैठक की शुरुआत में सेफ्टी बोर्ड के सभी सम्मानित सदस्यों ने कोयला खदानों में सुरक्षा संबंधित पूर्व के अनुभव एवं चुनौतियों के संदर्भ में अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिसको सदन ने सराहा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एस.एस. प्रसाद, DDG, SEZ ने खदान में कार्य करने वाली महिलाओं के लिए आधारभूत संरचना एवं सुरक्षा के पहलुओं पर जोर दिया। साथ ही हरेक साल होने वाली PME (Preliaminary Medical Examination) के लिए आवश्यक संरचना को अद्यतन बनाने का सुझाव दिया।
आर. टी. मंडेकर, DDG, CZ ने अपने संबोधन में महिलाओं के लिए अलग वॉशरुम तुरंत बनाने का सुझाव दिया. साथ ही अत्याधुनिक Vocational Training Centre भी बनाने पर जोर दिया. अन्य महत्वपूर्ण सलाह में न्यू लेबर कोड के अंतर्गत OSH (Occupational Safety & Health) के तहत एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाकर तत्काल लागू करने का सुझाव दिया. उन्होंने अपने अन्य उपक्रमों में कार्य करने के अनुभव को साझा करते हुए छोटे लेकिन महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिसका सदन ने स्वागत किया.
वहीं, सीसीएल, सीएमडी निलेंदु कुमार सिंह ने डीजीएमएस के सभी अधिकारियों, मुख्य़त DDG, CZ और DDG, SEZ को उनके श्रमिकों के हित में दिए गए बहुमूल्य सुझावों की प्रशंसा करते हुए सभी को तय कार्यक्रम के अनुरुप लागू करने का आश्वसन दिया और सीसीएल के दृष्टिकोण, श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोपरि को रेखांकित करते हुए, सभी सम्मानित सदस्यगणों के साथ कदम से कदम मिलाकर देशहित में कोयला उत्पादन लक्ष्य को पूरा करने का आह्वन किया.
रांची । विद्यार्थियों को वैश्विक औद्योगिक परिवेश के अनुरूप तैयार करने और उन्हें व्यवहारिक ज्ञान से समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी, रांची के स्कूल ऑफ कॉमर्स एवं मैनेजमेंट द्वारा प्रतिष्ठित पार्ले-जी फैक्ट्री का औद्योगिक भ्रमण आयोजित किया गया। "क्लासरूम से इंडस्ट्री तक, ज्ञान से अनुभव तक" थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को उद्योग जगत की वास्तविक कार्यप्रणाली, आधुनिक तकनीक और प्रोफेशनल कार्यसंस्कृति को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर प्रदान किया।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने बिस्किट निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया का गहन अध्ययन किया। कच्चे माल की गुणवत्ता जांच, स्वचालित उत्पादन प्रणाली, आधुनिक बेकिंग तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग, सप्लाई चेन मैनेजमेंट तथा वितरण व्यवस्था को नजदीक से देखा। फैक्ट्री के विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी प्रतिष्ठित ब्रांड की सफलता के पीछे गुणवत्ता, अनुशासन, नवाचार, तकनीकी दक्षता और ग्राहक विश्वास सबसे महत्वपूर्ण आधार होते हैं।
इस अवसर पर पार्ले-जी प्लांट के निदेशक जगन्नाथ झा ने कहा कि उद्योगों को ऐसे युवा प्रोफेशनल्स की आवश्यकता है, जिनके पास मजबूत शैक्षणिक आधार के साथ व्यावहारिक समझ, समस्या समाधान की क्षमता और सकारात्मक कार्य दृष्टिकोण हो। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर सीखने और बदलती तकनीकों के साथ स्वयं को अद्यतन रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट प्रमुख अंकित प्रकाश, स्कूल ऑफ कॉमर्स एवं मैनेजमेंट की प्रमुख पूजा गुप्ता, डॉ. रंजीत कुमार, स्मिता सिन्हा, अनिमा एवं स्मृति सहित शिक्षकगण उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए उद्योगों में उपलब्ध करियर अवसरों एवं व्यावसायिक अपेक्षाओं की जानकारी दी।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस. चटर्जी ने इस अवसर पर कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप अनुभवात्मक शिक्षा (Experiential Learning) ही भविष्य की आवश्यकता है। आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी, रांची विद्यार्थियों को केवल डिग्री नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल, नवाचार और नेतृत्व क्षमता से युक्त सक्षम प्रोफेशनल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसे औद्योगिक भ्रमण विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, विश्लेषणात्मक सोच और व्यावसायिक दृष्टिकोण का विकास करते हैं।
कुलसचिव डॉ. अमित कुमार पाण्डेय ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य उद्योग और शिक्षा के बीच मजबूत समन्वय स्थापित करना है। इसी उद्देश्य से विभिन्न राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ इंटर्नशिप, इंडस्ट्री विजिट, लाइव प्रोजेक्ट, विशेषज्ञ व्याख्यान और प्लेसमेंट गतिविधियों का नियमित आयोजन किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ उत्कृष्ट रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो सकें।
ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट प्रमुख अंकित प्रकाश ने कहा कि "Learning Beyond Classrooms, Experience Beyond Books" केवल एक संदेश नहीं, बल्कि आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी, रांची की शैक्षणिक कार्यप्रणाली का आधार है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य प्रत्येक विद्यार्थी को उद्योग की अपेक्षाओं के अनुरूप प्रशिक्षित करना तथा उन्हें भविष्य के लिए पूर्णतः तैयार करना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विभिन्न प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों के साथ और भी ऐसे शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किए जाएंगे।
विद्यार्थियों ने इस औद्योगिक भ्रमण को अपने शैक्षणिक जीवन का अत्यंत प्रेरणादायक अनुभव बताते हुए कहा कि इससे उन्हें पुस्तकों में पढ़े गए प्रबंधन सिद्धांतों और वास्तविक औद्योगिक प्रक्रियाओं के बीच संबंध को समझने का अवसर मिला। इस अनुभव ने उनके भीतर उद्योग जगत में करियर बनाने के प्रति नया उत्साह और आत्मविश्वास पैदा किया।
आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी, रांची का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तभी सार्थक होती है जब उसे व्यवहारिक अनुभव से जोड़ा जाए। इसी सोच के साथ विश्वविद्यालय उद्योग–अकादमिक सहयोग को निरंतर मजबूत करते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रहा है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची ने भारतीय फुटबॉल के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। पहली बार शहर में आयोजित 135वें इंडियन ऑयल डूरंड कप की शानदार ओपनिंग सेरेमनी ने न केवल खेल प्रेमियों का दिल जीता, बल्कि पूरे देश को झारखंड की समृद्ध संस्कृति और आयोजन क्षमता का भी परिचय कराया।
बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में आयोजित भव्य उद्घाटन समारोह में भारतीय सेना, झारखंड सरकार और खेल जगत की कई प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी रही। सेना के बैंड की प्रस्तुति, झारखंड की पारंपरिक सांस्कृतिक झलकियों और रंगारंग कार्यक्रमों ने उद्घाटन समारोह को यादगार बना दिया। आदिवासी लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को झारखंड की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।
समारोह के दौरान डूरंड कप, प्रेसिडेंट्स कप और शिमला ट्रॉफी का भव्य प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति के माध्यम से 138 वर्षों से भी अधिक पुराने डूरंड कप के गौरवशाली इतिहास और भारतीय फुटबॉल में उसके योगदान को दर्शाया गया। मैच से पहले दोनों टीमों का औपचारिक परिचय, किक-ऑफ और दर्शकों की जोरदार तालियों के बीच रांची ने फुटबॉल महाकुंभ का शानदार आगाज़ किया।
एशिया का सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट
डूरंड कप एशिया का सबसे पुराना और दुनिया का तीसरा सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट है। इसकी शुरुआत वर्ष 1888 में शिमला से हुई थी। भारतीय सेना की ईस्टर्न कमांड के नेतृत्व में आयोजित यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता आज भी भारतीय फुटबॉल की सबसे सम्मानजनक प्रतियोगिताओं में गिनी जाती है।
इस वर्ष डूरंड कप के मुकाबले कोलकाता, रांची, कोकराझार, इम्फाल और सिलिगुड़ी में खेले जा रहे हैं। टूर्नामेंट में 24 टीमें हिस्सा ले रही हैं और मैचों का सीधा प्रसारण Sony Sports Network तथा Sony LIV पर किया जा रहा है।
झारखंड के लिए बड़ी उपलब्धि
रांची को डूरंड कप की मेजबानी मिलना झारखंड के खेल इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे राज्य में फुटबॉल को नई पहचान मिलेगी, युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी और राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड की छवि और मजबूत होगी। आयोजन से पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
रांची /मेहरमा। झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पाण्डेय सिंह ने सोमवार को महागामा विधानसभा क्षेत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। इस क्रम में उन्होंने मेहरमा प्रखंड अंतर्गत पंचायत सचिवालय अमौर में सीमानपुर, अमौर, लकड़मारा, डोय, धनकुड़िया एवं सुरनी पंचायतों के बी.एल.ए., ठाकुरगंगटी प्रखंड कांग्रेस कार्यालय में सभी पंचायतों के बी.एल.ए. और महागामा के ऊर्जा नगर में नगर पंचायत क्षेत्र के बी.एल.ओ. के साथ अलग-अलग बैठक कर अभियान की प्रगति, बूथ स्तर पर चल रहे कार्यों और सामने आ रही चुनौतियों की विस्तृत समीक्षा की।
बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री दीपिका पाण्डेय सिंह ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत प्रत्येक नागरिक का मताधिकार है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची से वंचित न रहे और किसी का नाम अनावश्यक रूप से न हटे। उन्होंने सभी बी.एल.ए. एवं बूथ स्तर पर कार्य कर रहे साथियों से पूरी सजगता, निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ अभियान को सफल बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि महागामा विधानसभा क्षेत्र झारखंड की उन चुनिंदा विधानसभा क्षेत्रों में शामिल है जहाँ एसआईआर अभियान का कार्य बेहतर ढंग से आगे बढ़ रहा है। इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए सभी कार्यकर्ताओं, बी.एल.ए., एवं संगठन के साथियों के बीच बेहतर समन्वय और आपसी सहयोग आवश्यक है।
मंत्री ने बी.एल.ए. से अभियान के दौरान आ रही समस्याओं एवं चुनौतियों की जानकारी ली और कहा कि जाति एवं आवासीय प्रमाण-पत्र जैसी आवश्यक दस्तावेज़ी प्रक्रियाओं में लोगों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसी पात्र मतदाता को आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में कठिनाई का सामना न करना पड़े तथा आवश्यकता पड़ने पर समय पर अपील की प्रक्रिया भी पूरी की जा सके।
मंत्री दीपिका पाण्डेय सिंह ने कहा कि 5 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची (ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल) प्रकाशित होने के बाद प्रत्येक बूथ का बी.एल.ए., सूची का गंभीरता से परीक्षण करे। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम छूट गया हो या किसी प्रकार की त्रुटि हो तो उसका समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने दोहराया कि ईमानदारी, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम न छूटे और किसी का नाम बिना उचित कारण के न हटे।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाना केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि प्रत्येक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। सभी को मिलकर मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करना होगा।
