सिल्ली-मुरी : सावन के पावन महीने में कुशवाहा जागरण मंच, सिल्ली के तत्वावधान में सोमवार को श्रद्धा एवं भक्ति के साथ कांवर यात्रा निकाली गई। यात्रा में श्रद्धालु 110 लीटर पवित्र जल लेकर भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए रवाना हुए। इस दौरान हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।कांवर यात्रा में महिला, पुरुष एवं बच्चों सहित बड़ी संख्या में शिवभक्त शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने स्वर्णरेखा नदी से पवित्र जल संग्रह किया और पैदल यात्रा करते हुए शिव मंदिर पहुंचे। मंदिर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक एवं पूजा-अर्चना की। इसके उपरांत श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।कार्यक्रम में कुशवाहा जागरण मंच के अध्यक्ष मुकेश कुशवाहा, उपाध्यक्ष श्रवण कुशवाहा, उपसचिव अशोक कुशवाहा, कोषाध्यक्ष विजय कुशवाहा, अनुरोध कोइरी, बंसी कोइरी, संजय कुशवाहा, भोला कुशवाहा एवं मनोज कुशवाहा सहित मंच के पदाधिकारी एवं सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।आयोजकों ने कहा कि सावन के पावन अवसर पर कांवर यात्रा का उद्देश्य धार्मिक आस्था को मजबूत करने के साथ समाज में एकता, भाईचारा एवं सनातन संस्कृति को बढ़ावा देना है। यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की।
मुरी। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) मुरी ने अवैध शराब की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन ‘सतर्क’ के तहत सोमवार को बड़ी कार्रवाई की। RPF ने ट्रेन संख्या 18626 एक्सप्रेस (हटिया-मुरी) के जनरल कोच से दो लावारिस बैग बरामद किए। तलाशी लेने पर दोनों बैगों से कुल 40 बोतल अवैध शराब बरामद हुई, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 24 हजार रुपये बताई गई है।
जानकारी के अनुसार, ऑपरेशन ‘सतर्क’ के तहत RPF मुरी और फ्लाइंग टीम रांची द्वारा ट्रेन में विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान जनरल कोच में बाथरूम के समीप दो संदिग्ध लावारिस बैग दिखाई दिए। संदेह होने पर RPF जवानों ने बैगों की जांच की, जिसमें बड़ी मात्रा में शराब बरामद हुई।
इसके बाद जवानों ने आसपास मौजूद यात्रियों से बैग और शराब के संबंध में पूछताछ की, लेकिन किसी भी यात्री ने सामान पर अपना दावा नहीं किया। यात्रियों से पूछताछ के बाद RPF ने नियमानुसार शराब को जब्त कर लिया।
बरामद अवैध शराब को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए आबकारी विभाग, रांची को सौंप दिया गया है। RPF की इस कार्रवाई के बाद ट्रेन के माध्यम से अवैध शराब की तस्करी करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है।
इस विशेष जांच अभियान में RPF मुरी के अवर निरीक्षक रविशंकर, रवि शेखर, सहायक अवर निरीक्षक एम.के. जायसवाल, फ्लाइंग टीम रांची के डी.के. जिरावल और प्रदीप समेत अन्य RPF जवान शामिल रहे।
रांची। माटी कला बोर्ड के पुनर्गठन समेत विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को कुम्हार महासभा के बैनर तले बड़ी संख्या में कुम्हार समाज के लोग झारखंड विधानसभा के समक्ष पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से माटी कला बोर्ड का जल्द से जल्द पुनर्गठन करने और कुम्हार समाज से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से पहल करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में समाज के लोग हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते नजर आए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कुम्हार समाज की पारंपरिक माटी कला और उससे जुड़े रोजगार को संरक्षण और बढ़ावा देने के लिए माटी कला बोर्ड की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन बोर्ड के पुनर्गठन में हो रही देरी से समाज में नाराजगी बढ़ रही है।
कुम्हार महासभा के नेताओं ने कहा कि मिट्टी के बर्तन, दीये, मूर्तियां और अन्य माटी कला उत्पाद बनाने वाले कारीगरों के सामने आर्थिक और रोजगार से जुड़ी कई चुनौतियां हैं। आधुनिक बाजार में प्रतिस्पर्धा के बीच पारंपरिक कारीगरों को सरकारी सहयोग, प्रशिक्षण, बाजार उपलब्ध कराने और आर्थिक सहायता की जरूरत है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से माटी कला बोर्ड का तत्काल पुनर्गठन, कुम्हार समाज के पारंपरिक व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए ठोस नीति बनाने, कारीगरों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और माटी कला उत्पादों के लिए बाजार की बेहतर व्यवस्था करने की मांग की।
मौके पर साहेबगंज जिला कुम्हार महासंघ के जिलाध्यक्ष पिंटू पंडित, जिला महामंत्री ओमप्रकाश पंडित, रामा पंडित,प्रकाश कुमार पंडित ने कहा प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार तक आवाज पहुंचाने की कोशिश की और कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।
साहेबगंज। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् साहिबगंज विभाग संयोजक संजय दत्ता ने कहा कि जेपीएससी व जेएसएससी जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताएँ झारखंड के हजारों विद्यार्थियों के भविष्य पर गंभीर प्रभाव डाल रही हैं। ऐसे संवेदनशील और जीवन-निर्णायक विषयों पर समस्या के शांतिपूर्ण प्रदर्शन और संवाद के जरिए समाधान की कोशिश करने के बजाय राज्य द्वारा बलप्रयोग करना न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण बल्कि अस्वीकार्य भी है।
इस प्रकार की कार्रवाई स्पष्ट रूप से प्रदेश सरकार के विद्यार्थी-विरोधी रुख को उजागर करती है। वहीं, छात्र-हितों का संरक्षण करने वाली राजनीतिक पार्टियों द्वारा मौन रहना, जबकि वे राज्य सरकार का भागीदार हैं, उनके द्वैध चरित्र को भी दिखाता है। हम सरकार से दो बातों की तत्काल माँग करते हैं:
दमन की नीति को छोड़कर विद्यार्थियों से सार्थक संवाद शुरू किया जाए,
JPSC ओर JSSC के संदिग्ध परीक्षाओं को तत्काल रद्द कर सी बी आई के द्वारा निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करायी जाए, तथा परीक्षा व्यवस्था में आवश्यक तकनीकी, प्रशासनिक और संस्थागत सुधार लागू किए जाएँ।
विद्यार्थी परिषद शान्तिपूर्ण आंदोलन के अधिकार की रक्षा और विद्यार्थियों के भविष्य के संरक्षण के लिए लगातार आवाज़ उठाते रहेंगे। छात्रों के साथ हुई इस अमानवीय कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच CID ने सोमवार को JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई उस समय हुई है, जब रांची में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन तेज है।
रिपोर्टों के अनुसार, CID की जांच में परीक्षा संचालन से जुड़ी TDPL कंपनी को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए हैं। आरोप है कि ब्लैकलिस्टेड कंपनी को नियमों को दरकिनार कर परीक्षा संचालन का काम दिया गया था। CID ने खियांग्ते से पहले कई चरणों में पूछताछ भी की थी।
छात्रों के आंदोलन के बीच बड़ा एक्शन
खियांग्ते की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब सोमवार को JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर हजारों छात्र विधानसभा घेराव के लिए रांची पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच टकराव की स्थिति बनी और पुलिस ने वाटर कैनन तथा आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
यानी एक तरफ विधानसभा के बाहर छात्रों का उग्र प्रदर्शन और दूसरी तरफ JPSC के पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी—झारखंड में परीक्षा विवाद ने अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक रूप ले लिया है।
क्या लगा है आरोप
जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांगते पर टेंडर देने के नाम पर 2 करोड़ रु लेने एवं 20 प्रतिशत कमीशन की बात सामने आई है।
रांची, 10 अगस्त 2026। पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार झारखंड की पारंपरिक चौकीदारी व्यवस्था को बचाने तथा नौ सूत्री मांगों के समर्थन में झारखंड राज्य दफादार-चौकीदार पंचायत की ओर से सोमवार को झारखंड विधानसभा के सामने कूटे मैदान, रांची में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण दयाल सिंह ने की, जबकि संचालन रांची जिलाध्यक्ष राम किशुन गोप ने किया।
धरना-प्रदर्शन के दौरान पंचायत ने सेवा विमुक्त चौकीदारों को पुनः सेवा में योगदान कराने, 1 जनवरी 1990 के पूर्व एवं बाद में सेवानिवृत्त दफादार-चौकीदारों के आश्रितों की पूर्व नियुक्ति प्रक्रिया के अनुसार नियुक्ति करने तथा सेवा विमुक्त एवं एवजी चौकीदारों को न्याय दिलाने के लिए झारखंड चौकीदार संवर्ग नियमावली, 2015 में संशोधन करने की मांग की।
पंचायत की अन्य प्रमुख मांगों में चौकीदारी मैनुअल एवं राज्य सरकार के आदेशों के अनुरूप ही ड्यूटी लेने, प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में वेतन भुगतान सुनिश्चित करने, वेतनादि के लिए पुनः आवंटन करने, सभी बकाया सहित वर्दी भत्ता का भुगतान करने, 31 जनवरी 1989 को सेवानिवृत्त दफादार-चौकीदारों के आश्रितों की नियुक्ति करने, सरकारी उपस्थिति पंजी में साप्ताहिक उपस्थिति स्वयं दर्ज करने का अधिकार देने, साहिबगंज जिले में अनुकंपा के आधार पर जिला चयन समिति द्वारा चयनित चौकीदारों को तत्काल नियुक्ति पत्र देने तथा दफादार-चौकीदारों को कालबद्ध प्रोन्नति देने की मांग शामिल है।
धरना को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण दयाल सिंह ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की कि सेवा विमुक्त चौकीदारों को पुनः सेवा में योगदान कराने तथा 1 जनवरी 1990 के पूर्व एवं बाद में सेवानिवृत्त दफादार-चौकीदारों के आश्रितों की पूर्व नियुक्ति प्रक्रिया के अनुसार नियुक्ति के लिए चौकीदार संवर्ग नियमावली, 2015 में आवश्यक संशोधन किया जाए। उन्होंने कहा कि झारखंड की पारंपरिक चौकीदारी व्यवस्था को बचाने के लिए सरकार को तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने बताया कि झारखंड सरकार के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के पत्रांक 5020, दिनांक 11 सितंबर 2017 के माध्यम से राज्य के सभी उपायुक्तों एवं पुलिस अधीक्षकों को चौकीदार-दफादारों से चौकीदारी मैनुअल तथा राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी आदेशों के अनुरूप ही ड्यूटी लेने का निर्देश दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद कई जिलों में बैंक ड्यूटी, कैदी स्कॉट, रोड ड्यूटी एवं डाक ड्यूटी जैसे कार्य लिए जा रहे हैं।
कृष्ण दयाल सिंह ने विभागीय अपर मुख्य सचिव से मांग की कि वर्ष 2017 के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए सभी उपायुक्तों एवं पुलिस अधीक्षकों को पुनः स्पष्ट निर्देश जारी किया जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी आदेश के बावजूद कई थानों में चौकीदार-दफादारों को उपस्थिति पंजी में स्वयं उपस्थिति दर्ज नहीं करने दी जाती है और ड्यूटी करने के बाद भी उनकी उपस्थिति काट दी जाती है। उन्होंने कहा कि विभिन्न जिलों से चौकीदार-दफादारों के शोषण की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।
धरना-प्रदर्शन का संचालन करते हुए रांची जिलाध्यक्ष राम किशुन गोप ने कहा कि झारखंड गठन के लगभग 36 वर्ष बाद भी चौकीदार-दफादारों को प्रोन्नति का लाभ नहीं मिलना प्रशासनिक उदासीनता एवं लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने सरकार से चौकीदार-दफादारों की लंबित मांगों का शीघ्र समाधान करने की मांग की।
धरना-प्रदर्शन में मुख्य रूप से एतवा उरांव, राम किशुन गोप, शिबू पहाड़िया, सरयू यादव, मिथिलेश यादव, राजू कुमार, राम नारायण भोक्ता, भैया राम तुरी, कृष्ण महतो, सिकंदर यादव, परमेश्वर पासवान, धनराज प्रसाद यादव सहित बड़ी संख्या में दफादार एवं चौकीदार शामिल हुए।
रांची। विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त 2026 के अवसर पर सेक्टर-3, एन टाइप, धुर्वा में जनजाति सुरक्षा मंच की ओर से अपने पूर्वजों एवं विश्वभर के मूल निवासी जनजातीय समुदायों के साथ हुए अत्याचार और नरसंहार में मारे गए लोगों की स्मृति में दीप जलाकर श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर हक-अधिकार, अस्तित्व और अस्मिता की रक्षा के लिए संकल्प भी लिया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनजाति सुरक्षा मंच के क्षेत्रीय संयोजक संदीप उरांव ने कहा कि 9 अगस्त के पीछे के इतिहास को जानने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उनकी दृष्टि में 9 अगस्त को उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि शोक सभा के रूप में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने अमेरिका के मूल निवासी जनजातीय समुदायों के साथ हुए ऐतिहासिक अत्याचारों और विस्थापन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान ने पहले ही अनुसूचित जनजाति एवं आदिवासी समुदायों के अधिकारों, संरक्षण और सुरक्षा के लिए प्रावधान किए हैं। इसलिए अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति समाज को जागरूक रहना चाहिए।
मेघा उरांव ने कहा कि 9 अगस्त को लेकर यह सवाल उठता है कि इसे आदिवासी दिवस कहा जाए या मूल निवासी दिवस। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को इस विषय पर भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को गौरव दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। भगवान बिरसा मुंडा ने जल, जंगल, जमीन, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान किया था।
जनजाति सुरक्षा मंच के मीडिया प्रभारी सोमा उरांव ने कहा कि समाज को विदेशी प्रभाव और कथित षड्यंत्रों से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका सहित अन्य देशों में अत्याचार और नरसंहार के शिकार हुए पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए मरांग बुरू एवं जाहेर ऐरा से प्रार्थना की गई।
उन्होंने कहा कि इस अवसर पर अपनी धर्म-संस्कृति, रीति-रिवाज, पूजा-पाठ, जल-जंगल-जमीन और अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कृतसंकल्प होने का संकल्प लिया गया। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में डीलिस्टिंग की मांग को लेकर संघर्ष जारी रखा जाएगा।
कार्यक्रम में बिरसा भगत, कुमुदिनी लकड़ा, जय मंत्री उरांव, लुथुरु उरांव, माईसा उरांव, बबलू उरांव, लक्ष्मण उरांव, डॉ. बुटन महली सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे
रांची । रांची जिला प्रशासन ने 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव को लेकर छात्रों के नाम महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है।
प्रशासन के अनुसार, झारखंड विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में BNS की धारा 163 लागू की गई है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का विरोध प्रदर्शन या धरना करना गैरकानूनी होगा। यह प्रतिबंध माननीय झारखंड उच्च न्यायालय परिसर पर लागू नहीं होगा।
प्रशासन ने छात्रों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के आक्रामक या हिंसक प्रदर्शन से बचें और अपनी शिकायतों के समाधान के लिए शांतिपूर्ण एवं कानूनी रास्ता अपनाएं।
जिला प्रशासन ने चेतावनी दी है कि गैरकानूनी या हिंसक गतिविधियों में शामिल पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। प्रशासन ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों का असर छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड, पुलिस वेरिफिकेशन और भविष्य के रोजगार पर पड़ सकता है।
प्रशासन ने छात्रों से कहा है कि वे किसी के बहकावे में न आएं, संयम बनाए रखें और अपने भविष्य पर ध्यान केंद्रित करें।
रांची । मोरहाबादी मैदान में आयोजित दो दिवसीय झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने सभी राज्यवासियों को विश्व आदिवासी दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए जोहार से अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस को हम सभी जानते हैं। पूरे आदिवासी समाज को आज के इस दिवस को यादगार बनाने के का इंतजार रहता है। धरती पर आदिवासी समाज की अलग पहचान है। इसे अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए इस आदिवासी महोत्सव की शुरुआत हुई है। उन्होंने महोत्सव के लिये सभी लोगों के सहयोग व आशीर्वाद प्राप्त होने का आभार जताया। मुख्यमंत्री ने राज्य के माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार जी की गरिमामयी उपस्थिति को समारोह की विशेष गरिमा और आदिवासी समाज के गौरव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि हमारे लिए राज्यपाल महोदय केवल राज्य के राज्यपाल ही नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय के मार्गदर्शक और सर्वमान्य नेतृत्वकर्ता के रूप में हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल (टीएसी) राज्यपाल महोदय की छत्रछाया और मार्गदर्शन में कार्य करती है। टीएसी के माध्यम से आदिवासी समुदाय के हितों की रक्षा, उनके समग्र विकास और कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाती है। साथ ही, आदिवासी समाज के विकास के साथ-साथ पूरे समाज की प्रगति और भविष्य की दिशा तय करने में भी टीएसी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा एवं जीवनशैली को सामने लाने का प्रयास*
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के आदिवासी दिवस को पूरे देश और दुनिया में आदिवासी समाज अपने-अपने तरीके से यादगार बनाने में जुटा हुआ है। झारखंड में भी पिछले कुछ वर्षों से इस अवसर पर छोटे-बड़े विभिन्न कार्यक्रमों को आयोजित करके आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मोरहाबादी के पूरे मैदान में देश और राज्य के विभिन्न हिस्सों में निवास करने वाले आदिवासी समुदायों की विविधता और सांस्कृतिक झलक देखने को मिल रही है। आयोजन स्थल पर पंडाल लगाए गए हैं, जहां हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग अपनी जीवनशैली, कला, संस्कृति, परंपरा और आजीविका के साधनों को प्रदर्शित कर रहे हैं। यह आयोजन हमें यह भी दिखाता है कि किस तरह आदिवासी समाज अपनी पारंपरिक पहचान को संजोते हुए विकास और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन में केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से भी आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हुए हैं। कलाकारों, कारीगरों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों की सहभागिता ने इस आयोजन को और भी अधिक व्यापक स्वरूप प्रदान किया है। उनके हुनर, परंपरा और अनुभवों के माध्यम से एक मजबूत और बेहतर रास्ते की तलाश में आगे बढ़ते आदिवासी समाज की तस्वीर यहां देखने को मिल रही है। इस अवसर पर राज्य में विभिन्न गतिविधियों और कार्यक्रमों के माध्यम से आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत को सम्मान और सशक्तिकरण का प्रदर्शन हो रहा है।
*झारखंड की सवा तीन करोड़ जनता के प्रति राज्य सरकार संवेदनशील*
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आज राज्य विश्व आदिवासी दिवस धूमधाम से मना रही है, वहीं हमारे कुछ युवा, नौजवान और छात्र-छात्राएं अपनी कुछ मांगों और अधिकारों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार खुले मन से उनकी बातें सुन रही है और उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझने का प्रयास कर रही है। हर समस्या का समाधान संवाद से संभव है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि इतनी बड़ी व्यवस्था का संचालन करते हुए भी सरकार की मंशा राज्य के सवा तीन करोड़ लोगों के प्रति पूरी संवेदनशीलता के साथ काम करने की है। गांव में रहने वाला व्यक्ति हो या शहर में रहने वाला, किसान हो या मजदूर, महिला हो या पुरुष, पढ़ा-लिखा नौजवान हो या कम पढ़ा-लिखा अथवा अशिक्षित व्यक्ति—सरकार सभी की चिंता करती है और सबके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जिस विषय को लेकर राज्य के नौजवान अपने अधिकार की आवाज उठा रहे हैं, वह उनकी जागरूकता और अपने हक के लिए खड़े होने के साहस को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि नौजवानों ने हिम्मत इसलिए जुटाई है, क्योंकि उन्हें विश्वास है कि उनके साथ न्याय होगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि मेरे संज्ञान में गड़बड़ी सामने आई है, उसकी जांच होगी, नौजवानों को न्याय मिलेगा और जिन लोगों ने गड़बड़ी की है, उन्हें कठोर से कठोर सजा दी जाएगी। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए धरती पुत्र की भांति कहा कि आप विश्वास रखिए, हम इसी मिट्टी में जन्मे हैं और इसी मिट्टी में दफन भी होंगे। इसलिए हम आपके साथ गलत नहीं होने देंगे।
*संवाद से हर समस्या का समाधान संभव, दिग्भ्रमित नहीं हों युवा*
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि इस पूरे विषय को राजनीतिक रूप से देखने की आवश्यकता नहीं है, और न ही युवाओं को किसी राजनीतिक छत्रछाया की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बड़ी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पालते हैं और राजनीतिक दलों का इस्तेमाल कर युवा पीढ़ी को अपने हित में इस्तेमाल करने का रास्ता अख्तियार करते हैं।
उन्होंने विशेष रूप से नौजवानों से कहा कि वे विद्यार्थी हैं, उनका अपना अधिकार है और उन्हें उनका अधिकार एवं न्याय मिलना चाहिए। यह जिम्मेदारी सरकार की है और सरकार इसे पूरा करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरे देश में अलग-अलग तरीके से राजनीतिक दलों की नजर युवा पीढ़ी पर है। किस तरह युवाओं को सही और गलत तथ्यों के बीच दिग्भ्रमित किया जाए, इसके लिए बड़े पैमाने पर प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसमें केवल सामान्य लोग ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े विद्वान, पढ़े-लिखे और ज्ञानी लोग भी शामिल हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी बात सरकार के समक्ष पूरी स्पष्टता और निर्भीकता के साथ रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब केवल आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के माध्यम से ही8 युवाओं की बातें सुनने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन युवाओं तक भी पहुंचने का प्रयास कर रही है, जो घर बैठे अपनी समस्याओं और अपेक्षाओं को लेकर चिंतित हैं। इसके लिए सरकार ने संवाद का माध्यम भी बनाया है।
*व्यक्ति अमीर हो या गरीब, संविधान सभी को बराबरी का अधिकार देता है*
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने देश को जो संविधान दिया है, वह देश में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को समान अधिकार प्रदान करता है। व्यक्ति अमीर हो या गरीब, संविधान सभी को बराबरी का अधिकार देता है, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी के 75 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद समाज में असमानता पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है। आने वाले वर्षों में देश आजादी की शताब्दी की ओर बढ़ेगा, लेकिन आज भी समाज के विभिन्न वर्गों के बीच बड़ी असमानताएं मौजूद हैं। समाज, राज्य और देश में आर्थिक एवं सामाजिक असमानताएं जितनी बढ़ेंगी, तनाव भी उतना ही बढ़ेगा। इसलिए इन असमानताओं को दूर करना और सभी वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराना समय की बड़ी आवश्यकता है।
*झारखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि वीरों की भूमि है*
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आज लोकतंत्र की मूल भावना को चुनौती देने के लिए भी एक बड़ा समूह पूरी ताकत और शिद्दत के साथ प्रयासरत है। हालांकि, झारखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि वीरों की भूमि है। यह वह धरती है, जहां देश के बड़े हिस्से में आजादी का सपना देखने की शुरुआत भी नहीं हुई थी, उस समय से झारखंड के वीर पूर्वज अपने अधिकार, अस्मिता और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे हैं। संघर्ष की यह परंपरा आज भी जारी है। उन्होंने कहा कि झारखंड को अलग राज्य बने 25 वर्ष हो चुके हैं और इन वर्षों में राज्य ने अपने पैरों पर खड़े होने तथा अपनी अलग पहचान स्थापित करने की दिशा में लगातार प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था, जब झारखंड को केवल संसाधनों के दोहन के लिए एक चारागाह की तरह देखा गया, लेकिन आज जब यह राज्य अपनी ताकत और क्षमता के साथ आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है, तो यह बात कई लोगों को स्वीकार नहीं हो रही है।
*युवाओं को सजग रहने की आवश्यकता*
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य की प्रगति और उसकी बढ़ती ताकत को रोकने के लिए कभी चेहरा छिपाकर, कभी चेहरा बदलकर और कभी पर्दे के पीछे से गलत संदेश देने तथा लोगों को दिग्भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे प्रयासों के प्रति समाज और विशेषकर युवाओं को सजग रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान बातचीत और लोकतांत्रिक तरीके से निकाला जा सकता है। सीमाओं पर देश के दुश्मनों से मुकाबला अलग विषय है, लेकिन देश के भीतर रहने वाले अपने ही लोगों के साथ लाठी-डंडे के बल पर किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
*युवाओं, विद्यार्थियों का पारदर्शिता के साथ होगा न्याय*
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से युवाओं, विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि वे स्वयं को युवाओं से अलग नहीं मानते। आपकी भावनाएं और सभी की चिंताएं उनकी चिंताएं हैं। उन्होंने कहा कि आज संवैधानिक जिम्मेदारी के स्थान पर रहते हुए वे युवाओं को आश्वस्त करना चाहते हैं कि उनके साथ पूरी पारदर्शिता के साथ न्याय होगा और न्याय केवल होगा ही नहीं, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देगा।
*आदिवासी महोत्सव गौरवशाली विरासत, संघर्ष और पहचान को याद करने का अवसर*
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का यह महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी गौरवशाली विरासत, संघर्ष और पहचान को याद करने का अवसर है। उन्होंने कामना की कि यह महोत्सव यादगार और प्रेरणादायक बने तथा आदिवासी समाज अपने गौरव और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे ऐसे वीर सपूतों के वंशज हैं, जिन्होंने अपने हक-अधिकार और जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष किया। जल, जंगल और जमीन केवल उनके जीवन के संसाधन नहीं, बल्कि उनके जीवन की शुरुआत से लेकर अंत तक उनकी संस्कृति और अस्तित्व से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि आज उन्हें गर्व है कि वे आदिवासी हैं।
*मुख्यमंत्री ने जताया आभार*
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने आदिवासी महोत्सव में सशरीर एवं अन्य माध्यमों से उपस्थित सभी लोगों के प्रति आभार जताया।
*इनकी रही उपस्थिति..*
इस अवसर पर राज्य के मंत्री श्री राधा कृष्ण किशोर, सांसद राज्यसभा श्रीमती महुआ माजी, विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन, विधायक श्री अमित महतो, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, विकास आयुक्त श्री अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव श्रीमती वंदना दादेल, अपर मुख्य सचिव श्री नितिन मदन कुलकर्णी सहित अन्य गणमान्य अतिथिगण, राज्य सरकार के पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोग उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आदिवासी महोत्सव में सशरीर एवं अन्य माध्यमों से उपस्थित सभी लोगों के प्रति आभार जताया।
इनकी रही उपस्थिति..
इस अवसर पर राज्य के मंत्री राधा कृष्ण किशोर, सांसद राज्यसभा महुआ माजी, विधायक कल्पना सोरेन, विधायक अमित महतो, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल, अपर मुख्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी सहित अन्य गणमान्य अतिथिगण, राज्य सरकार के पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोग उपस्थित थे।
सिल्ली: सिल्ली प्रखंड अंतर्गत कोंचो पंचायत के सुंडील गांव में शनिवार को वीर शहीद निर्मल महतो का शहादत दिवस श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गांव में स्थापित उनकी आदमकद प्रतिमा पर उपस्थित लोगों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और नमन किया।कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि शहीद निर्मल महतो ने अलग झारखंड राज्य के सपने को साकार करने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने झारखंड की अस्मिता, अधिकार और न्याय के लिए संघर्ष करते हुए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनकी शहादत ने झारखंड आंदोलन को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान की।वक्ताओं ने कहा कि निर्मल महतो का संघर्ष और बलिदान झारखंडवासियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा। अलग राज्य के निर्माण के लिए उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।मौके पर जिला परिषद सदस्य (पूर्वी) लक्ष्मी देवी, सिल्ली मुखिया भरत मुंडा, अखिल महतो, अखिलेश कुम्हार, धनेश्वर महतो, सौरभ कुमार समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं अन्य लोग उपस्थित थे।
