दिनांक 01.02.2026 को समय 08:30 बजे स्थानीय चौकीदार के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि पांकी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कुसड़ी टोला पुरानी बथान में दो पक्षों के बीच आपसी विवाद के कारण तीन लोगों की हत्या कर दी गई है। सूचना प्राप्त होते ही उक्त सूचना का सन्हा दर्ज कर सत्यापन एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु वरीय पुलिस पदाधिकारी को अवगत कराया गया। सूचना के आलोक में पु०नि० जीतराम महली, पु०अ०नि० आशुतोष रजक, पु०अ०नि० गोपाल कुमार राय, स०अ०नि० रविन्द्र कुमार एवं सशस्त्र बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचने पर यह तथ्य सामने आया कि महेशी भुईयां (उम्र लगभग 62 वर्ष) की मृत्यु दिनांक 01.02.2026 की सुबह बीमारी के कारण हुई थी। मृतक महेशी भुईयां की मृत्यु को डायन-विषाही एवं ओझागुणी जैसे अंधविश्वास से जोड़ते हुए उनके पुत्र रविन्द्र भुईयां एवं प्रमोद भुईयां आक्रोशित हो गए और इसी अंधविश्वास के कारण उन्होंने विजय भुईयां (उम्र लगभग 50 वर्ष), उनकी पत्नी हेवन्ती देवी उर्फ फुलवन्ती देवी (उम्र लगभग 45 वर्ष) एवं उनके पुत्र छोटू कुमार (उम्र 19 वर्ष) पर टांगी एवं चाकू से हमला कर उनकी हत्या कर दी। वहीं विजय भुईयां की पुत्री को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया गया, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।
पुलिस अधीक्षक, पलामू के निर्देशानुसार अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, लेस्लीगंज के नेतृत्व में एक विशेष छापामारी दल का गठन किया गया। छापामारी दल द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए इस कांड के प्राथमिकी अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार अभियुक्त
1. रविन्द्र भुईयां, उम्र 30 वर्ष, पिता स्व० महेशी भुईयां, ग्राम कुसड़ी टोला पुरानी बथान, थाना पांकी, जिला पलामू
2. प्रमोद भुईयां, उम्र 26 वर्ष, पिता स्व० महेशी भुईयां, ग्राम कुसड़ी टोला पुरानी बथान, थाना पांकी, जिला पलामू
बरामदगी
1. घटना में प्रयुक्त टांगी (प्राथमिकी अभियुक्त प्रमोद भुईयां के निशानदेही पर)
इस संबंध में पांकी थाना कांड संख्या-10/2026, दिनांक-01.02.2026,
धारा 118(1)/118(2)/109(1)/351(3)/103(1)/3(5) भारतीय न्याय संहिता, 2023 एवं 3/4 डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
छापामारी दल
1. मनोज कुमार झा, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, लेस्लीगंज (पांकी), पलामू
2. पु०नि० जीतराम महली, अंचल पुलिस निरीक्षक, पांकी अंचल
3. पु०अ०नि० रविन्द्र राहुल साय, पांकी थाना
4. पु०अ०नि० आशुतोष रजक, पांकी थाना
5. पु०अ०नि० गोपाल कुमार राय, पांकी थाना
6. स०अ०नि० रविन्द्र कुमार, पांकी थाना
7. पांकी थाना रिजर्व गार्ड
पलामू पुलिस की अपील
पलामू पुलिस आमजनों से अपील करती है कि डायन-विषाही प्रथा समाज पर एक गंभीर कलंक है। इस अंधविश्वास को समाप्त करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। अंधविश्वास नहीं, जागरूकता अपनाएं और डायन-विषाही प्रथा को जड़ से समाप्त करने में सहयोग करें।
(रांची ऋषभ राजा ) झारखंड के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों में वित्तीय अनुशासन और सरकारी धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्यपाल सचिवालय ने सख्त निर्देश जारी किए हैं .निर्देशों के तहत विश्वविद्यालयों को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और केनरा बैंक में जमा या निवेशित सरकारी राशि को तत्काल वापस लेने और भविष्य में इन बैंकों में किसी भी प्रकार की नई राशि जमा न करने का आदेश दिया गया है .
राज्यपाल सचिवालय ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और प्रभारी कुलपतियों को निर्देशित किया है कि वे वित्त विभाग द्वारा 29 जनवरी को जारी दिशा-निर्देशों के आलोक में अविलंब आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें. साथ ही, यह स्पष्ट किया गया है कि यदि राशि स्थानांतरण के लिए नया बैंक खाता खोलना आवश्यक हो, तो इसके लिए वित्त विभाग की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी . बिना अनुमति के किसी भी परिस्थिति में नया खाता खोलने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा .
सरकारी धन की सुरक्षा पर सवाल
वित्त विभाग की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और केनरा बैंक में झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लाइज मास्टर ट्रस्ट और जेटीडीसी लिमिटेड की ओर से जमा सावधि राशि के मामलों में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, जालसाजी और फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए हैं. पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित संस्थाओं की ओर से जमा की गई राशि को वापस करने में दोनों बैंकों की ओर से टालमटोल की जा रही है, जिससे सरकारी धन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं .
इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि राज्य सरकार के सभी विभागों, कार्यालयों, विश्वविद्यालयों, बोर्डों, स्वायत्त संस्थानों और स्थानीय प्राधिकरणों की ओर से सेंट्रल बैंक व केनरा बैंक में रखी गई सावधि जमा और अन्य सरकारी राशि को चरणबद्ध तरीके से वापस लिया जाए और उसे राज्य सरकार से अनुमोदित बैंकों में स्थानांतरित किया जाए .
गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं
राज्यपाल सचिवालय से जारी निर्देशों में यह भी कहा गया है कि इन आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी होगी . राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों में रांची विश्वविद्यालय, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, बिनोद बिहारी महतो विश्वविद्यालय कोयलांचल, विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग, नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय मेदिनीनगर, कोल्हान विश्वविद्यालय चाईबासा, सिद्धो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका, जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय आदि शामिल हैं. इनमें कई के खाते इन बैंकों में हैं, अब इस निर्देश के आलोक में उन्हें अपनी निवेशित सरकारी राशि तत्काल इन बैंकों से निकालनी होगी .
(रांची ऋषभ राजा ) स्पोर्ट्स कराटे एसोसिएशन ऑफ झारखंड के तत्वावधान में 31 जनवरी एवं 1 फरवरी को रांची के टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित झारखंड ओपन कराटे चैंपियनशिप में खूंटी जिले के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले का नाम रोशन किया . प्रतियोगिता में लोयोला हाई स्कूल परिसर स्थित कराटे सेंटर के खिलाड़ियों ने चार स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का शानदार परिचय दिया . चैंपियनशिप में अमर उरांव ने अंडर-21 एवं सीनियर वर्ग के 60 किलोग्राम भार वर्ग में दमदार प्रदर्शन करते हुए दोहरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया. वहीं 12 वर्ष आयु वर्ग में जयस राज ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक हासिल किया .
इसके अलावा 13 वर्ष आयु वर्ग में सुशील नाग और शिवम सिंह ने भी उत्कृष्ट खेल दिखाते हुए स्वर्ण पदक जीतकर खूंटी जिले का गौरव बढ़ाया . ऐमन असदक ने 13 वर्ष आयु वर्ग के 60 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक प्राप्त कर जिले को एक और सफलता दिलाई . खूंटी के खिलाड़ियों की इस उपलब्धि से जिले के खेल प्रेमियों, अभिभावकों और प्रशिक्षकों में खुशी की लहर है . इस अवसर पर जिला कराटे संघ के अध्यक्ष सह कोच हेजाज असदक ने कहा कि खिलाड़ी लगातार कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के साथ अभ्यास कर रहे हैं . इन पदकों से यह सिद्ध होता है कि खूंटी के कराटे खिलाड़ी राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं .
साहेबगंज। नगरपालिका (आम) निर्वाचन–2026 के अंतर्गत आज नामांकन प्रक्रिया के चौथे दिन साहिबगंज जिले के साहिबगंज नगर परिषद, राजमहल नगर पंचायत एवं बरहरवा नगर पंचायत हेतु अभ्यर्थियों द्वारा उत्साहपूर्वक नामांकन किया गया।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विभिन्न पदों के लिए नामांकन जमा शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित रूप से संपन्न हो रही है। निर्वाचन कार्य में सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई थीं तथा अभ्यर्थियों एवं उनके समर्थकों द्वारा निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन किया गया।
चौथे दिन नामांकन पत्र भरने की स्थिति निम्नवत् रही :
साहिबगंज नगर परिषद
• अध्यक्ष पद के लिए-02
• वार्ड पार्षद पद, वार्ड संख्या 01 से 07 के लिए –02
• वार्ड पार्षद पद, वार्ड संख्या 08 से 14 के लिए –05
• वार्ड पार्षद पद, वार्ड संख्या 15 से 21 के लिए –05
• वार्ड पार्षद पद, वार्ड संख्या 22 से 28 के लिए –13
नगर पंचायत, राजमहल
• अध्यक्ष पद के लिए –02
• वार्ड पार्षद पद, वार्ड संख्या 01 से 07 के लिए –07
• वार्ड पार्षद पद, वार्ड संख्या 08 से 14 के लिए –07
नगर पंचायत, बरहरवा
• अध्यक्ष पद के लिए –00
• वार्ड पार्षद पद, वार्ड संख्या 01 से 07 के लिए –01
• वार्ड पार्षद पद, वार्ड संख्या 08 से 14 के लिए –01
प्रशासन द्वारा नामांकन प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने हेतु सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
जिला निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा सभी इच्छुक अभ्यर्थियों से निर्धारित तिथि एवं समय-सीमा के भीतर नामांकन पत्र क्रय एवं नामांकन दाखिल करने की अपील की गई है।
रांची। नगरपालिका (आम) निर्वाचन-2026 अंतर्गत आज दिनांक 02.02.2026 को रांची समाहरणालय एवं बुण्डू अनुमंडल कार्यालय में बनाये गये निर्वाची पदाधिकारियों के कक्ष से अभ्यर्थियों ने अपना नामांकन दाखिल किया।
महापौर के लिए आज शून्य और सभी 53 वार्ड के लिए कुल 94 अभ्यर्थियों ने अपना नामांकन दाखिल किया, इनमें 65महिलाएं हैं।
महापौर के लिए अब तक 21 अभ्यर्थी नाम निर्देशन पत्र खरीद चुके हैं तथा किसी भी अभ्यर्थी ने नामांकन दाखिल नहीं किया है। आज महापौर पद के लिए अन्तु तिर्की, अजय मुण्डा, सुरेन्द्र लिण्डा, सुजित विजय आनंद कुजूर और सेनेन डेजी सुरिन ने नाम निर्देशन पत्र खरीदे।
सभी 53 वार्डों में नामांकन दाखिल करने की संख्या निम्न है:-
वार्ड 1 - 00
वार्ड 2 - 02
वार्ड 3 - 05
वार्ड 4 - 06
वार्ड 5 - 04
वार्ड 6 - 03
वार्ड 7 - 01
वार्ड 8 - 00
वार्ड 9 - 03
वार्ड 10 - 01
वार्ड 11 - 01
वार्ड 12 - 01
वार्ड 13 - 02
वार्ड 14 - 02
वार्ड 15 - 00
वार्ड 16 - 01
वार्ड 17 - 02
वार्ड 18 - 03
वार्ड 19 - 00
वार्ड 20 - 00
वार्ड 21 - 01
वार्ड 22 - 00
वार्ड 23 - 03
वार्ड 24 - 02
वार्ड 25 - 01
वार्ड 26 - 01
वार्ड 27 - 01
वार्ड 28 - 02
वार्ड 29 - 02
वार्ड 30 - 03
वार्ड 31 - 02
वार्ड 32 - 06
वार्ड 33 - 02
वार्ड 34 - 05
वार्ड 35 - 01
वार्ड 36 - 01
वार्ड 37 - 01
वार्ड 38 - 00
वार्ड 39 - 00
वार्ड 40 - 02
वार्ड 41 - 01
वार्ड 42 - 04
वार्ड 43 - 00
वार्ड 44 - 01
वार्ड 45 - 03
वार्ड 46 - 03
वार्ड 47 - 00
वार्ड 48 - 01
वार्ड 49 - 03
वार्ड 50 - 04
वार्ड 51 - 00
वार्ड 52 - 01
वार्ड 53 - 00
*बुण्डू नगर पंचायत में वार्ड पार्षद के लिए नामांकन दाखिल करने की संख्या निम्न है:-*
वार्ड 1 - 01
वार्ड 2 - 00
वार्ड 3 - 01
वार्ड 4 - 00
वार्ड 5 - 02
वार्ड 6 - 00
वार्ड 7 - 00
वार्ड 8 - 02
वार्ड 9 - 00
वार्ड 10 - 00
वार्ड 11 - 03
वार्ड 12 - 02
वार्ड 13 - 00
उधवा(साहिबगंज ) झारखंड के एकमात्र रामसर साइट उधवा झील पक्षी आश्रयाणी में विश्व आद्रभूमि दिवस के अवसर पर वन विभाग द्वारा विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वन क्षेत्र पदाधिकारी श्री पंचम दुबे के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आद्रभूमियों के संरक्षण, उनके पारिस्थितिक महत्व तथा जैव विविधता के संरक्षण के प्रति आमजन में जागरूकता फैलाना रहा। इस अवसर पर आश्रयाणी क्षेत्र एवं झील के आसपास स्वच्छता अभियान चलाया गया, जिसमें प्लास्टिक कचरे एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थों को हटाया गया। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों एवं पर्यटकों को आद्रभूमियों के महत्व, जल स्रोतों की सुरक्षा तथा पर्यावरण संतुलन बनाए रखने को लेकर जानकारी दी गई।
वन क्षेत्र पदाधिकारी श्री पंचम दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि उधवा पक्षी आश्रयाणी अंतरराष्ट्रीय महत्व की आद्रभूमि है, जिसे रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है। यह क्षेत्र प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों का प्रमुख आश्रय स्थल होने के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण एवं जल संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि आश्रयाणी क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखें तथा वन विभाग के संरक्षण प्रयासों में सक्रिय सहयोग करें।कार्यक्रम के दौरान आद्रभूमियों को वन्यजीवों एवं पक्षियों के लिए अत्यंत आवश्यक बताते हुए इनके संरक्षण में जनभागीदारी पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि आद्रभूमियों के संरक्षण से न केवल वन्यजीव सुरक्षित रहते हैं, बल्कि स्थानीय समुदाय की आजीविका और पर्यावरणीय संतुलन भी सुदृढ़ होता है।इस अवसर पर वनरक्षी अखलेश मरांडी, श्री पप्पू यादव एवं सनी रजक सक्रिय रूप से उपस्थित रहे और कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही भारतीय वन्यजीव संस्थान के गंगा प्रहरी, डॉल्फिन वॉचर एवं अन्य वनकर्मी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे ll
रांची। जिला अंतर्गत पिठौरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत पिठौरिया चौक पर मंगलवार को एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। पतरातू की ओर से तेज रफ्तार में आ रहे एक टर्बो वाहन ने चौक पर खड़ी , एक कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि आसपास मौजूद लोग दहशत में आ गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
गनीमत रही कि इस दुर्घटना में किसी प्रकार की जान-माल की क्षति नहीं हुई, जिससे सभी ने राहत की सांस ली। हालांकि हादसे के बाद टर्बो चालक मौके का फायदा उठाते हुए होशियारी से कन्नी काटकर घटनास्थल से फरार हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही पिठौरिया थाना की पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के साथ-साथ प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ कर रही है ताकि फरार टर्बो चालक की पहचान की जा सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिठौरिया चौक पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है, जिससे आए दिन हादसों की आशंका बनी रहती है। लोगों ने प्रशासन से चौक पर स्पीड ब्रेकर, ट्रैफिक पुलिस की तैनाती और सख्त निगरानी की मांग की है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और फरार चालक की तलाश जारी है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में नगर निगम चुनाव–2026 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। नामांकन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचते ही महापौर पद के लिए तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। इस बार रांची नगर निगम में कांग्रेस समर्थित रमा खलको और भाजपा समर्थित रोशनी खलको के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला तय माना जा रहा है। सोमवार देर शाम भारतीय जनता पार्टी ने महापौर पद के लिए रोशनी खलको को समर्थन देने की औपचारिक घोषणा की। इसके साथ ही भाजपा की चुनावी रणनीति भी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। इससे पहले कांग्रेस ने झारखंड महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रमा खलको को अपना समर्थित उम्मीदवार घोषित कर दिया था।
गौरतलब है कि महापौर पद का आरक्षण भले ही अनुसूचित अन्य (ST) श्रेणी के लिए है, लेकिन इस बार दोनों राष्ट्रीय दलों ने महिला उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है। कांग्रेस द्वारा रमा खलको को समर्थन दिए जाने के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि भाजपा भी महिला प्रत्याशी को ही आगे करेगी, जिस पर सोमवार को अंतिम मुहर लग गई। रांची राज्य का सबसे बड़ा नगर निगम है, जहां लाखों मतदाता निवास करते हैं। ऐसे में यहां की चुनावी रणनीति न केवल अहम है, बल्कि पूरे राज्य की राजनीति की दिशा भी तय कर सकती है। दोनों ही दलों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि जनता किस उम्मीदवार पर भरोसा जताती है। मतदान 23 फरवरी को होगा, जबकि मतगणना और परिणाम 27 फरवरी को घोषित किए जाएंगे। उसी दिन यह साफ हो जाएगा कि रांची की जनता ने किसे अपना नया महापौर चुनती है।
तिनसुकिया। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने रविवार को असम के तिनसुकिया जिला में ऑल आदिवासी स्टूडेंट एसोसिएशन ऑफ आसाम द्वारा आयोजित "21वीं आदिवासी महासभा-2026" को संबोधित करते हुए कहा कि यहां आप सभी आदिवासी समुदाय के लोग जो लगभग डेढ़ सौ वर्षों से यहां रह रहे हैं उनसे रू-ब-रू होने का आज मुझे मौका मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के वैसे सभी आदिवासी-मूलवासी समुदाय के जनमानस जो असम में रह कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं उनकी तकलीफों, उनपर हो रहे अत्याचारों और व्यथा को सुनने के लिए हम आज यहां आए हैं। हम लोग झारखंड से आए हैं, कहीं न कहीं आप सभी का जुड़ाव भी झारखंड से बहुत पुराना रहा है। झारखंड एक ऐसा प्रदेश है जब देश के लोग आजादी का सपना भी नहीं देखे थे, उस समय आजादी की लड़ाई हमारे पूर्वज अंग्रेजों के साथ लड़ रहे थे। देश की आजादी में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, सिदो कान्हू, तिलका मांझी सहित झारखंड के अनगिनत वीर सपूतों का अहम योगदान रहा है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे वीर सपूतों ने पीढ़ियों को बचाने, जल, जंगल, जमीन को बचाने के लिए अपना बलिदान दिया है। आदिवासी समाज के लोगों ने ही अंग्रेजों से सबसे पहले लोहा लेने का काम किया था।आखिर किस कारण से आज देश के विभिन्न हिस्सों में आदिवासी समाज के लोग अपने हक-अधिकार की लड़ाई के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी, मूलवासी, दलित, पिछड़ा वैसे वर्ग है जो समाज के सबसे कमजोर एवं नीचे पायदान में रहने वाले लोग हैं। ऐसी क्या परिस्थिति आ गई जो यहां के आदिवासी-मूलवासी अलग-थलग होकर बिखरने को मजबूर हुए हैं। कई जगहों पर आदिवासी समुदाय के लोग हाशिए पर रहकर अपना जीवन जी रहे हैं। इन विषयों पर गंभीर चिंतन की जरूरत है।मौके पर मुख्यमंत्री ने असम के कद्दावर आदिवासी नेता स्व० प्रदीप नाग एवं प्रसिद्ध गायक स्व० जुबिन गर्ग को श्रद्धांजलि अर्पित की।
*राज्य सरकार की योजनाओं को घर-घर पहुंचने का हुआ कार्य*
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि देश आजाद हुए 75 साल हो गए हैं। देश में कई नीतियां-कानून बने। देश के संविधान से हमें रक्षा कवच मिला उसके बावजूद आज हम कहां खड़े हैं। आज हमारा समाज कितना संघर्ष कर रहा है यह बहुत बेहतर तरीके से आप सभी लोग जानते हैं। आज सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक रूप से आदिवासी समुदाय कमजोर है और इसी कमजोरी का फायदा बड़े एवं सामंती विचारधारा वाले लोग बहुत चालाकी से उठाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदरणीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी आज हमारे बीच नहीं हैं, जब उन्होंने अलग राज्य की परिकल्पना की तो कुछ लोग मजाक उड़ाते थे कि आदिवासी लोग अलग राज्य बनाएंगे। आज सच्चाई पूरे देश के सामने हैं। वर्ष 2000 में अलग झारखंड राज्य झारखंड बना। यह बात सही है कि उस समय क्या नारा लगता था, कैसे लेंगे झारखंड, लड़के लेंगे झारखंड। उस समय न मोबाइल, न गाड़ी, न मोटर उसके बावजूद झारखंड के लोग जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए चीटियों की तरह एकजुट हो जाते थे। राज्य अलग हुआ लेकिन इसका फायदा आदिवासी समुदाय को नहीं मिला। हम लोगों को तो राज्य लेना था, हमारे अग्रणी नेताओं ने सोचा कि राज्य अलग होगा तो यहां के आदिवासियों-मूलवासियों का विकास होगा। झारखंड राज्य अलग होने के बाद बौद्धिक रूप से मजबूत लोगों ने 15 वर्ष से ज्यादा समय तक झारखंड को पीछे धकेलने का काम किया, नतीजा यह हुआ कि राशन कार्ड लेकर लोग भात-भात-कहते हुए भूख से मरने को विवश हुए, फिर हमने प्रखंड-प्रखंड, गांव-गांव, टोला-टोला पहुंचकर लोगों को जागरूक करने का काम किया फिर लोगों ने हमें राज्य की बागडोर संभालने का मौका दिया। राज्य का बागडोर संभालते ही हमने 5 साल के भीतर स्थिति को बदलने की कोशिश की और हमें सफलता भी मिली। वैसे गरीब, पीड़ित, शोषित, आदिवासी-मूलवासी समुदाय के लोग जो कभी जिला ऑफिस, प्रखंड कार्यालय नहीं देखे थे, बीडीओ, सीओ, डीसी, एसपी को नहीं जानते थे उनतक हमने राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को पहुंचाने का काम किया है।
आदिवासी अपना हक-अधिकार, अपनी मान्यता के लिए कर रहे संघर्ष
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में रहते हुए हमारे यहां के आदिवासी अपना हक-अधिकार, अपनी मान्यता के लिए संघर्षशील हैं। आज आदिवासियों के हितैषी बनने वाले लोग आदिवासियों को ही हाशिए पर रखने के लिए उतारू हैं। वे जानते हैं कि आदिवासी समाज अगर आर्थिक और बौद्धिक रूप से मजबूत हो गया तो वे अपनी हक-अधिकार, जल-जंगल-जमीन की बात करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा की जरूरत पड़ने पर आसाम में रहने वाले आदिवासियों की मदद करने के लिए पूरा झारखंड का आदिवासी समाज आगे आकर खड़ा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समुदाय की एकजुटता ही हमारी पहचान है। पहले दुनिया हमारी एकजुटता का लोहा मानती थी। हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई सभी वर्ग-समुदाय के लोगों की एकजुटता देश को मजबूती प्रदान करती है, लेकिन पिछले कुछ समय से बौद्धिक और आर्थिक रूप से समृद्ध लोगों ने हमारी एकजुटता पर प्रहार करने का काम किया है।
*राज्य में महिलाएं हुई सशक्त*
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में झारखंड सबसे ज्यादा योगदान देने वाला राज्य है। हमारी सरकार ने यह तय किया है कि इस राज्य ने बहुत कुछ दिया है अब इस राज्य के लोगों को वापस देने की जरूरत है। हमारे राज्य के संसाधन का सही मूल्य मिले इस पर हम बेहतर कार्यपद्धति से आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) के वार्षिक सम्मेलन में एक आदिवासी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झारखंड ने अपनी ऐतिहासिक उपस्थिति दर्ज किया है। आज झारखंड ने वैश्विक पटल पर अपनी बातें पहुंचाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने राज्य की आधी आबादी को आत्मनिर्भरता की राह पर ले जाने का काम कर दिखाया है। प्रत्येक माह राज्य की लगभग 55 लाख महिलाओं को मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत उनके बैंक खाते में 2500 रुपए की राशि भेजी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हमारे विकास मॉडल की कॉपी दूसरे राज्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना की राशि पिछले दो वर्षों से निरंतर यहां की महिलाओं को मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने झारखंड के नौजवानों के लिए गए महत्वाकांक्षी स्कीम्स लागू किए हैं। यहां के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए 15 लख रुपए तक का एजुकेशन लोन बिना कोई गारंटी के उपलब्ध कराई जा रही है।
इस अवसर पर मंत्री चमरा लिंडा, सांसद विजय हांसदा, विधायक मो० ताजुद्दीन उर्फ एमटी राजा, ASSAA सेंट्रल कमेटी के अध्यक्ष रेजन होरो, उपाध्यक्ष डेविड तिर्की , अमरजीत केरकेट्टा, अल्बर्ट ओरिया सहित अन्य सदस्यगण, असम के कोने-कोने से बड़ी संख्या में पहुंचे महिला, पुरुष, नौजवान, बच्चे, बच्चियां सहित आदिवासी समुदाय के लोग उपस्थित थे।
साहेबगंज। झारखंड के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक 'राजकीय माघी पूर्णिमा मेला' इस वर्ष भी पूरी भव्यता के साथ शुरू हो गया है। राजमहल की पावन उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर आयोजित इस मेले में न केवल झारखंड बल्कि असम, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे पड़ोसी राज्यों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु और आदिवासी समुदाय के लोग पहुंच रहे हैं।
सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र है राजमहल: उपायुक्त हेमंत सती
मेले को संबोधित करते हुए साहिबगंज के उपायुक्त हेमंत सती ने कहा कि राजमहल और साहिबगंज के निवासियों के लिए यह सौभाग्य की बात है कि वे इस पावन मिट्टी पर निवास करते हैं, जहाँ उत्तरवाहिनी गंगा बहती है। उन्होंने इस स्थान की तुलना प्रयागराज (इलाहाबाद) के संगम से करते हुए कहा कि राजमहल की उत्तरवाहिनी गंगा का महत्व और पवित्रता किसी भी मायने में कम नहीं है।
उपायुक्त हेमंत सती ने विशेष रूप से आदिवासी समुदाय के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि दूर-दराज के प्रदेशों से आने वाले श्रद्धालु यहाँ गंगा पूजन करते हैं और यहाँ का पवित्र जल अपने धार्मिक स्थलों (जैसे जाहिर स्थान) पर अर्पण करते हैं, जो हमारी समृद्ध संस्कृति का द्योतक है। उन्होंने मेले के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की जानकारी दी:
स्वच्छता और प्रकाश: पूरे मेला क्षेत्र में साफ-सफाई की पुख्ता व्यवस्था और पर्याप्त रोशनी के लिए लाइट्स लगवाई गई हैं。
सांस्कृतिक कार्यक्रम: शाम के समय विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है, जिसमें आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी。
प्रशासनिक मुस्तैदी: बेहतर विधि-व्यवस्था के लिए मैजिस्ट्रेट्स और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई है。
*सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 20 पुलिस पोस्ट तैनात: श्री अमित कुमार ( पुलिस अधीक्षक, साहिबगंज)*
मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर साहिबगंज के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार सिंह ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस पूरी तरह से मुस्तैद है。 उन्होंने बताया कि:
सघन गश्त: रात के समय सुनसान और संवेदनशील इलाकों में बाइक पेट्रोलिंग के जरिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है。
पुलिस चौकियाँ: पूरे मेला क्षेत्र में सुरक्षा की निगरानी के लिए 20 विशेष पुलिस पोस्ट स्थापित किए गए हैं。
यातायात प्रबंधन: वाहनों के आवागमन को सुचारू बनाए रखने के लिए ट्रैफिक मैनेजमेंट को प्राथमिकता दी गई है, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो。
पुलिस अधीक्षक, अमित कुमार ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे पूरे उत्साह और शांति के साथ मेले का आनंद लें और प्रशासन का सहयोग करें।
आदिवासी महाकुंभ का आकर्षण
राजकीय माघी पूर्णिमा मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह आदिवासी महाकुंभ के रूप में भी जाना जाता है। यहाँ विभिन्न राज्यों से आने वाले आदिवासी भाई-बहन अपनी पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ-साथ अपनी कला और संस्कृति का प्रदर्शन भी करते हैं। प्रशासन ने मीडिया बंधुओं का भी आभार व्यक्त किया, जिनके माध्यम से इस ऐतिहासिक मेले की गूँज दूर-दूर तक पहुँच रही है।
