रांची: झारखंड विधानसभा परिसर स्थित विधानसभा औषधालय में सोमवार को स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वयं रक्तदान कर शिविर का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री ने रक्तदान को एक महान मानवीय कार्य बताते हुए कहा कि यह ऐसा पुण्य कार्य है, जिससे कई जरूरतमंद लोगों को नया जीवन मिलता है। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को रक्तदान के महत्व को समझना चाहिए और समय-समय पर रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा के सभी सदस्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों से इस पुनीत कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि रक्तदान से न केवल किसी की जान बचाई जा सकती है, बल्कि समाज में मानवता और सहयोग की भावना भी मजबूत होती है।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष , मंत्रीगण, विधायकगण तथा विधानसभा के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में कई लोगों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान कर इस अभियान में भागीदारी निभाई।
रांची। अर्पिता महिला मंडल की अध्यक्षा प्रीति सिंह के मार्गदर्शन में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस बड़े उत्साह और सहभागिता के साथ मनाया। इस अवसर पर विभिन्न रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया तथा महिला कर्मियों के सम्मान के लिए विशेष समारोह भी आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत इंटर-एरिया रंगोली प्रतियोगिता से हुई, जिसमें सभी 15 क्षेत्रों की प्रतिभागियों के साथ मुख्यालय की महिला कर्मचारियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। रंग-बिरंगी और आकर्षक रंगोलियों में प्रतिभागियों की रचनात्मकता, सांस्कृतिक भावनाएँ और नारी शक्ति की झलक देखने को मिली, जिससे पूरा वातावरण रंगीन और जीवंत हो उठा।
कार्यक्रम को और रोचक बनाने के लिए फल, सब्जी और ड्राई फ्रूट ज्वेलरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। अर्पिता महिला मंडल की सदस्याओं ने इसमें बढ़-चढ़कर भाग लिया और फलों, सब्जियों तथा ड्राई फ्रूट से बनी अनोखी और आकर्षक आभूषण डिज़ाइन प्रस्तुत किए। इस प्रतियोगिता ने प्रतिभागियों की कलात्मक प्रतिभा और सृजनशीलता को उजागर किया।
इस अवसर पर अर्पिता महिला मंडल ने सीसीएल की महिला कर्मियों, जो जवाहर नगर कॉलोनी, दरभंगा हाउस तथा गांधी नगर अस्पताल और कॉलोनी में कार्यरत हैं, को भी सम्मानित किया। सम्मान समारोह के दौरान महिला कर्मियों को छाता, गमछा, स्टील टिफिन बॉक्स और टियारा भेंट कर उनके समर्पण और कड़ी मेहनत के लिए सम्मानित किया गया। इस पहल के माध्यम से उनके महत्वपूर्ण योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
इस अवसर पर अर्पिता महिला मंडल की अध्यक्षा ने सभी सदस्यों और कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना की। उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण, उनके योगदान को पहचानने और उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच प्रदान करने के महत्व पर जोर दिया।
कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों की सराहना और विजेताओं को पुरस्कार वितरण के साथ हुआ, जिससे यह महिला दिवस समारोह सभी के लिए प्रेरणादायक और यादगार बन गया।
इस कार्यक्रम में अर्पिता महिला मंडल की अध्यक्षा प्रीति सिंह, उपाध्यक्षा रीता मिश्रा, तथा रीता तिवारी और नीरू हंजूरा उपस्थित रहीं।
बुंडू: अनुमंडल कार्यालय के मुख्य द्वार के पास नालियों का गंदा पानी सड़क पर बहने से आम लोगों और ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कार्यालय में आने-जाने वाले लोगों को पहले गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, उसके बाद ही वे सरकारी दफ्तर तक पहुंच पाते हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नाली का पानी सड़क पर फैलने से आसपास गंदगी और बदबू का माहौल बन गया है। इससे पैदल चलने वाले लोगों को काफी दिक्कत हो रही है। खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार लंबे समय से नालियों की सफाई नहीं होने के कारण पानी सड़क पर बह रहा है, जिससे आसपास गंदगी बढ़ रही है और बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है। बावजूद इसके अब तक प्रशासन की ओर से इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द नालियों की सफाई कराने और पानी की उचित निकासी की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि अनुमंडल कार्यालय आने वाले लोगों को इस समस्या से राहत मिल सके।
शेखपुरा।चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता सह पर्यावरण प्रेमी ने सोमवार को जिले के पुलिस अधीक्षक बलिराम कुमार चौधरी को उनके कार्यालय कक्ष में तीन पेज का लिखित आवेदन दे कर गुहार लगाया की शेखपुरा थाना में मेरे व अन्य के ख़िलाफ़ पुरी तरह से दर्ज कराएं गए झुठे व फर्जी कांड संख्या- 248/24 में दोष मुक्त करते हुए केस कर्ता,केस के अनुसंधानकर्ता रिंकू रंजन कुमार,केस के पुर्व पर्यवेक्षण पदाधिकारी सह सेवानिवृत्त अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी,शेखपुरा अरविन्द कुमार सिंहा तथा वर्तमान केस के पर्यवेक्षण पदाधिकारी सह अपर पुलिस अधीक्षक सह अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी,शेखपुरा डांँ.राकेश कुमार द्वारा केस कर्ता व साजिश कर्ता के अनैतिक मेल व लेन देन में आकर मेरे व अन्य के खिलाफ़ गिरफ्तारी व अन्य दंडात्मक कार्रवाई के आलोक में इन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करते हुए कड़ी से कड़ी कानूनी व विधि सम्मत व विभागीय कार्रवाई करने की मांग की है.अरशद के आवेदन पर एसपी ने डीएसपी साइबर शेखपुरा को जांच करने का आदेश दिया है.एसपी के आदेश से भ्रष्ट पुलिस पदाधिकारी में बेचैनी व दहशत देखी जा रही है तो दुसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर व्याप्त है.
रांची। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य पर आज झारखंड जनाधिकार महासभा द्वारा रांची में "धर्म सत्ता, पितृ सत्ता और महिलाओं की आजादी" पर एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के आयोजन में आदिवासी विमेंस नेटवर्क, कैथोलिक हेल्थ एसोसिएशन (बिहार- झारखंड- अंडमान), संभवा इंजोर, महिला मुक्ति संघर्ष (चतरा), शक्ति अभियान (झारखंड), महिला उत्पीड़न विरोधी एवं विकास समिति समेत कई संगठनों की प्रमुख भूमिका रही। कार्यक्रम में विभिन्न समुदायों, धर्मों और राजनैतिक सोच से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं ने भाग लिया।
संचालन अलका आईंद, लीना और रोज़ मधु तिर्की ने किया। कार्यक्रम का आधार पत्र किरण ने प्रस्तुत किया। उन्होंने महिला दिवस के क्रांतिकारी इतिहास को याद दिलाया। उन्होंने बताया कि धर्म सत्ता, पितृ सत्ता और राज सत्ता महिलाओं को दोयम दर्जे का इंसान बनाकर रखते हैं। इसके विरुद्ध ही सभी एकजुट हुई हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता नीलम तिग्गा ने कहा कि पुरुष चाहते हैं कि महिला घर के कामों पर ही ध्यान दे और बाहर न जाएं। उनकी आजादी पर अंकुश लगाया जाता है। धार्मिक संगठनों में पुरुष ही निर्णयों को महिलाओं पर थोपते हैं। महिलाओं की जिम्मेवारी स्वागत तक सीमित कर दिया जाता है।
एपवा की नंदिता भट्टाचार्य ने कहा कि महिलाओं ने लड़ाई कर बहुत अधिकारों को जीती हैं। लेकिन आज के दिन देश की सत्ता इन सब अधिकारों को खत्म कर रही हैं। साथ ही, न्यायालय भी मनुवादी सोच के अनुसार एक के बाद एक महिला विरोधी निर्णय दे रही है। "राते और सड़कें हमारी है".
थेयोलॉजिकल कॉलेज से जुड़ी प्रोफ इदन टोपनो ने कहा कि सभी धर्म पितृसत्तात्मक हैं और उनकी आंतरिक समीक्षा होनी चाहिए कि महिलाओं को बराबर माना जाता है या हाशिए पर धकेला जाता है।
सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला ने कहा कि झारखंड में आदिवासी महिलाओं के अधिकारों के संघर्ष का सैंकड़ों सालों का इतिहास है। झारखंड अलग राज्य आंदोलन में महिलाओं की प्रमुख भागीदारी थी। लेकिन अलग राज्य बनने के बाद विभिन्न सत्ताओं में महिलाएं कहां हैं। बड़े बड़े कारोपोरेट घराने महिलाओं के जीवन के हर पहलुओं को तितर बितर कर रहे हैं। अब महिलाओं को राजनैतिक शक्ति अपने हाथ में लेकर इन सब के विरुद्ध लड़ने की जरूरत है।
पश्चिम बंगाल से आई मनीषा ने कहा कि हिंदुस्तान में आजादी के साथ ही महिलाओं को वोट का अधिकार मिला था। लेकिन मोदी सरकार इसे खत्म कर रहीं है। चुनाव आयोग ने बंगाल में जो SIR किया है, उसमें एक करोड़ लोगों का नाम वोटर सूची से कट गया है जिसमें अधिकांश महिलाएं हैं।
शक्ति क्लब से जुड़ी निकी ने कहा कि धर्म में महिलाओं के लिए बहुत पाबंदी है। सभी समुदायों के महिलाओं के साथ मिलकर वे भी अपनी समुदाय में महिलाओं के अधिकारों के लिया संघर्ष करना चाहती हैं।
महिला मुक्ति संघर्ष समिति, चतरा की संजू देवी ने कहा कि महिलाएं कुछ भी करें लेकिन नाम पुरुषों का ही होता है।
आदिवासी जन परिषद की सेलीना लकड़ा ने कहा कि वे आदिवासी अधिकारों और जमीन के विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय रही हैं। लेकिन जब वे पार्षद चुनाव लड़ी, तब पुरुषों ने साथ नहीं दिया।
पाकुड़ से आई मीना मुर्मू ने कहा कि रोज़ महिलाओं के बलात्कार और कत्ल हो रहा है। वे लगातार दोषियों को सजा दिलाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
कैथोलिक हेल्थ एसोसिएशन की रश्मि , प्रियशीला बेसरा, हीरामनी व अन्य महिलाओं ने गानों और कविताओं के साथ अपनी बातों को रखा।
आलम आरा ने कहा कि विभिन्न धर्मों के पुरुष ठेकेदार ही आपस में लड़वाते रहते हैं। हर धर्म की महिलाएं एक हैं और उन सबका शोषण और उसके खिलाफ लड़ाई एक है।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि समानता और आजादी के लिए संघर्ष करेंगे और धर्म सत्ता, पितृसत्ता और राज सत्ता दे महिलाओं पर नियंत्रण करने के हर प्रयास का विरोध किया जाएगा।
कार्यक्रम में अशिष्ण बागे, अमल पांडेय, एलिना होरो, बिल्कन डांग, रॉयल डांग, कुमुद, सिराज, टॉम कावला, भरत भूषण चौधरी, माला, नसरीन जमाल, श्रीनिवास, मंथन, सुधांशु शेखर, उत्तम, प्रवीर पीटर, आकांक्षा, मनोज, रोज खाखा आदि साथी भी उपस्थित रहे।
रांची। सरकारी योजनाओं की सफलता अक्सर केवल नीति या बजट से तय नहीं होती, बल्कि उस प्रशासनिक ढांचे की क्षमता से तय होती है जो इन योजनाओं को जमीन पर लागू करता है। यदि प्रशासनिक मशीनरी तेज, दक्ष और तकनीकी रूप से सक्षम हो, तो वही योजना जो कागज पर सीमित दिखाई देती है, लाखों लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकती है।झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग में इन दिनों एक ऐसी पहल आकार ले रही है, जिसे देश में प्रशासनिक सुधार के एक नए प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है। विभाग ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रशिक्षण देना शुरू किया है। इस पहल के साथ झारखंड देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जहां किसी सरकारी विभाग ने अपने कर्मचारियों के लिए AI आधारित क्षमता निर्माण को संस्थागत रूप दिया है।यह पहल केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं है। यह उस सोच का परिणाम है जिसके केंद्र में यह विचार है कि यदि प्रशासनिक तंत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाए तो शासन व्यवस्था अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बन सकती है।
इस पहल के पीछे ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य और पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की स्पष्ट सोच और दीर्घकालिक दृष्टि मानी जा रही है।प्रशासनिक सुधार की शुरुआत कर्मचारियों से झारखंड में ग्रामीण विकास विभाग का दायरा बहुत व्यापक है। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होने वाली कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन इसी विभाग के माध्यम से होता है।इन योजनाओं में प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (PMAY-G), झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS), वाटरशेड विकास कार्यक्रम, ग्रामीण सड़क और आधारभूत संरचना, तथा पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से संचालित विकास योजनाएं शामिल हैं।इन सभी योजनाओं का संचालन एक जटिल प्रशासनिक और सूचना तंत्र पर निर्भर करता है। लाभार्थियों की पहचान से लेकर योजना की स्वीकृति, बजट वितरण, कार्य की प्रगति और अंतिम रिपोर्ट तक हर स्तर पर डेटा और दस्तावेजों का आदान-प्रदान होता है।लंबे समय तक यह पूरा तंत्र पारंपरिक तरीकों पर आधारित रहा — फाइलें, नोटशीट, मैनुअल रिपोर्टिंग और एक्सेल शीट्स। इससे कामकाज चलता तो रहा, लेकिन कई बार निर्णय लेने की प्रक्रिया धीमी हो जाती थी और सूचनाओं के प्रवाह में देरी भी होती थी।इसी चुनौती को देखते हुए ग्रामीण विकास विभाग ने प्रशासनिक ढांचे को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में कदम उठाया।
17 अक्टूबर 2025: एक नई पहल की शुरुआत
इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम 17 अक्टूबर 2025 को उठाया गया, जब विभाग ने औपचारिक रूप से ग्रामीण AI सपोर्ट सेल की स्थापना की।इस सेल का उद्देश्य केवल तकनीक को अपनाना नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में AI के उपयोग को व्यवस्थित और स्थायी रूप से स्थापित करना है।सेल के माध्यम से विभाग की योजना है कि आने वाले समय में प्रशासनिक कार्यों को डिजिटल टूल्स और डेटा आधारित प्रणालियों के माध्यम से अधिक प्रभावी बनाया जाए।इस पहल को आगे बढ़ाने में विनोद कुमार पांडेय, जो कि The/Nudge Institute के साथ इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव फेलो के रूप में विभाग से जुड़े हैं, और चंद्र भूषण, जो विभाग में अवर सचिव हैं, की प्रमुख भूमिका रही है।इन दोनों अधिकारियों की पहल पर विभाग ने AI आधारित प्रशिक्षण और डिजिटल प्रशासन के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है।
कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
AI सपोर्ट सेल के गठन के बाद विभाग ने सबसे पहले अपने कर्मचारियों को इस नई तकनीक से परिचित कराने का निर्णय लिया।जनवरी और फरवरी 2026 के बीच विभाग ने छह प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया, जिनमें 40 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की विशेषता यह थी कि इसमें प्रशासनिक व्यवस्था के विभिन्न स्तरों के कर्मचारियों को शामिल किया गया।
प्रशिक्षण पाने वालों में शामिल थे:
• कंप्यूटर ऑपरेटर
• डाटा एंट्री कर्मचारी
• अनुभाग अधिकारी
• सहायक अधिकारी
• अवर सचिव स्तर तक के अधिकारी
इसका उद्देश्य यह था कि तकनीक का लाभ केवल उच्च स्तर के अधिकारियों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रशासनिक ढांचे के हर स्तर तक पहुंचे।प्रशिक्षण में क्या सिखाया गया
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कर्मचारियों को AI की मूलभूत अवधारणाओं के साथ-साथ उसके व्यावहारिक उपयोग के बारे में भी बताया गया।कर्मचारियों को यह सिखाया गया कि वे AI टूल्स का उपयोग करके अपने रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्यों को अधिक तेजी और दक्षता के साथ कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए —
• सरकारी नोटशीट और आधिकारिक पत्र तैयार करना
• लंबी फाइलों और दस्तावेजों का सारांश निकालना
• डेटा का विश्लेषण करना
• योजनाओं की प्रगति पर डैशबोर्ड तैयार करना
• रिपोर्ट और प्रस्तुतिकरण बनाना
इन प्रशिक्षण सत्रों में यह भी बताया गया कि AI का उपयोग करते समय डेटा सुरक्षा और जिम्मेदार उपयोग के सिद्धांतों का पालन कैसे किया जाए।
इन AI टूल्स का दिया गया प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को कई आधुनिक AI टूल्स के उपयोग से परिचित कराया गया। इनमें शामिल हैं —
• Claude AI
• Microsoft Copilot
• Power BI
• Perplexity AI
• Gamma
इन टूल्स की मदद से कर्मचारी दस्तावेज तैयार करने, डेटा विश्लेषण करने और रिपोर्टिंग को अधिक प्रभावी बनाने में सक्षम हो रहे हैं।
योजनाओं की निगरानी में आएगा बड़ा बदलाव
AI आधारित प्रणाली लागू होने के बाद विभाग की प्रमुख योजनाओं की निगरानी में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।
विभाग की योजना है कि PMAY-G जैसी योजनाओं के लिए लाइव डैशबोर्ड विकसित किए जाएं, जिनके माध्यम से अधिकारियों को वास्तविक समय में योजना की प्रगति की जानकारी मिल सके।
इसके अलावा विभिन्न योजनाओं से जुड़े डेटा को एक ही मंच पर लाने के लिए इंटीग्रेटेड ग्रामीण डेटा हब विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
यदि यह योजना सफल होती है तो अधिकारियों को किसी भी जिले या प्रखंड में चल रही योजनाओं की स्थिति तुरंत देखने की सुविधा मिल सकेगी।
नागरिकों के लिए भी विकसित होंगे AI टूल्स
AI सपोर्ट सेल की योजना केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं है। विभाग भविष्य में नागरिकों के लिए भी AI आधारित डिजिटल सेवाएं विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।
इसमें एक महत्वपूर्ण पहल AI आधारित चैटबॉट विकसित करने की है, जिसके माध्यम से ग्रामीण नागरिक योजनाओं से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
यह चैटबॉट लोगों को यह बताने में मदद करेगा कि वे किसी योजना के लिए पात्र हैं या नहीं, उनका आवेदन किस स्थिति में है और उन्हें आगे क्या करना चाहिए।
इससे ग्रामीण नागरिकों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हो सकती है।
जिला और प्रखंड स्तर तक पहुंचेगा प्रशिक्षण
विभाग की योजना है कि AI प्रशिक्षण को केवल मुख्यालय तक सीमित न रखा जाए।
आने वाले चरणों में जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को भी इस प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा।
इसमें उप विकास आयुक्त, प्रखंड विकास पदाधिकारी और अन्य फील्ड स्तर के अधिकारी शामिल होंगे।
इसके साथ ही विभाग से जुड़े अन्य संस्थानों जैसे Rural Engineering Organisation (REO) और Jharkhand State Livelihood Promotion Society (JSLPS) के कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मंत्री ने बताया भविष्य का विजन
ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य और पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है।उनके अनुसार —“सरकारी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है जब उनका लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचे। इसके लिए जरूरी है कि हमारे अधिकारी और कर्मचारी आधुनिक तकनीक से सशक्त हों। AI प्रशिक्षण की यह पहल प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करेगी और झारखंड को तकनीक आधारित सुशासन का एक मॉडल राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
कांके। सोमवार को काँके प्रखंड परिसर में, जनजाति सुरक्षा मंच झारखंड प्रदेश के तत्वाधान में,झारखंड विधानसभा से डीलिस्टिंग बिल पास कर केंद्र भेजने सहित 11सूत्री मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व बोड़या मुखिया सोमा उरांव ने किया . प्रदर्शन के बाद जनजाति सुरक्षा मंच के द्वारा मुख्यमंत्री, झारखंड सरकार एवं राज्यपाल झारखंड के नाम धरना के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी कांके को मांग पत्र सौंपा गया।
मांग पत्र में मुख्य रूप से
1. झारखंड सरकार (मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन) में वर्तमान समय में जो जाति प्रमाण पत्र निर्गत हो रहा है, उस जाति प्रमाण पत्र में केवल पिता का नाम होता है, अर्थात यह 2013 से चला आ रहा है। उस समय कैबिनेट से एक चिट्ठी निर्गत हुई थी जिसमें कोई जनजाति आदिवासी महिला यदि अन्य दूसरे पुरुष से शादी/विवाह करती है तो वह मायके से जाति प्रमाण पत्र बना सकता है। इसका दूर परिणाम 2013 से यह हो रहा है की जनजाति महिला दूसरे पुरुष से शादी कर रहे हैं और मायके से जाति प्रमाण पत्र बनाकर सबसे पहले धर्मांतरण, नौकरी, जमीन, सरकार की योजनाएं तथा एकल पद मुखिया, प्रमुख, जिला परिषद तथा विधानसभा एवं लोकसभा के जनजातियों के रिजर्व सीट पर धर्मात्रित ईसाई और मुस्लिम काबिज हो रहे हैं। इसी के कारण बंगाला देशीय घुसबैठिया का भी बोलबाला हो गया है। इसी कारण जाति प्रमाण पत्र में पिता के नाम के साथ-साथ पति का नाम होना अनिवार्य हो ताकि जनजातियों का आरक्षण बच सके। नोट:- इस बावत झारखंड मंत्रालय से एक पत्र निर्गत की जाए।
2. झारखंड राज्य में सी.एन.टी. एवं एस.पी.टी. एक्ट होते हुए भी सदा पट्टा पर जमीनों की खरीद बिक्री हो रही है। सदा पट्टा पर लेन-देन होने के बाद नोटरी पब्लिक का मोहर लग रहा है, इस पर तुरंत रोक लगाई जाए।
3. पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए जाति प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र एवं आय प्रमाण पत्र एक सप्ताह के अंदर देने की व्यवस्था करें। ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।
4. ग्रामीणों को पंजी-कक में प्लॉट नम्बर, खाता नम्बर, रकबा तथा नाम में त्रुटि सुधार हेतू ग्रामीणों को सुविधा हो, अधिक भाग-दौड़ न हो और अधिकारी रूपयों की माँग न करें। इसे आम जन के लिए सरल बनाया जाए।
5. जनजातियों/आदिवासियों की सामाजिक व्यवस्थाओं की जमीन, सरना, मसना, हड़बोड़ी, अखरा, गाँवा देवती, जतरा पूजा स्थल, जमीन, भूईहरी, डाली कतारी, खूंटकटी, मुण्डा जमीन, महतो जमीन, पईनभोरा जमीन वगैरह जमीन की रक्षा एवं सवर्द्धन हेतू कड़ा कानून बनायें। आज प्राय: ऐसे जमीनों पर अपने ही समाज के लोग कब्जा किये हुए हैं या दूसरे व्यक्तियों के द्वारा कब्जा कर रहें है। बहुत ऐसे पूजा स्थल/जमीन अभी वर्तमान में है और वहाँ पूजा-पाठ परम्परागत से हो रहा है परन्तु खतियान एवं पंजी-कक में किसी दूसरे व्यक्ति/समुदाय के नाम से दर्ज है तथा रसीद भी कट रहा है जो कि आनेवाले दिनों में जनजातियों के लिए बहुत बड़ा समस्या खड़ा कर सकता है। यदि ऐसा जमीन ही नही रहेगा तो आदिवासी कहां जाएगा इसलिए ऐसे जमीनों को चिन्हित कर संरक्षण किया जाए।
6. पंचायत जनप्रतिनिधियों की आकस्मिक मृत्यु/दुर्घटना की स्थिति में 50,00,000/- (पचास लाख) रूपये का बीमा/मुआवजा दिया जाए एवं विधायकों की तरह सेवा समाप्ति के बाद पेंशन दी जाए और आत्मरक्षा हेतू अंगरक्षक एवं शस्त्र की लाईसेंस दी जाए।
7. भारत की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, और यह देश के संसाधनों और विकास पर भारी दबाव डाल रही है। जनसंख्या वृद्धि के कारण, देश में गरीबी, बेरोजगारी, और पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। भारत में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करना आवश्यक है। यह कानून सभी नागरिकों के लिए समान रूप से लागू होना चाहिए, चाहे वे किसी भी धर्म या जाति, अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक के हों। इस कानून के तहत, प्रत्येक परिवार को दो बच्चों तक सीमित किया जाना चाहिए।
8. हिन्दुओं के मंदिर में दान पुण्य का पैसा का नियंत्रण सरकार के पास है, ठीक उसी प्रकार चर्च एवं मस्जिद में दान-पुण्य का पैसा का नियंत्रण भी सरकार के पास हो, नहीं तो मंदिर से भी नियंत्रण हटाया जाए।
9. ग्रामीण क्षेत्रों में जब से स्मार्ट मीटर लगा है, उसके बाद से ग्रामीणों का पाँच गुणा दस गुणा बिजली बिल आ रहा है जिससे ग्रामीण अत्यधिक परेशान है तथा शिकायत करने पर भी सुनवाई नही होती है। जनहित को देखते हुए इसे अति सरल बनाया जाए।
10. सरकार द्वारा प्रस्तावित नगड़ी में रिम्स-2 निर्माण हेतू भूमि को दुसरे जगह पर रिम्स-2 निर्माण किया जाए एवं नगड़ी के कृषि युक्त भूमि को आदिवासियों/मुलवासियों को वापस किया जाए जिससे ग्रामीण खेतीबारी कर जीवन यापन कर सके।
11. नोट:- झारखंड सरकार विधानसभा से डीलिस्टिंग का बिल पास कर महामहिम राज्यपाल महोदय से हस्ताक्षर कराकर केंद्र भेजें। केंद्र सरकार डीलिस्टिंग बिल अति शीघ्र पास करें। डीलिस्टिंग यानि जो जनजाति अपनी रुढ़ि प्रथा, संस्कृति, परंपरा छोड़कर ईसाई या इस्लाम धर्म अपना लिए है, वैसे लोगों को अनुसूचित जनजाति का आरक्षण का लाभ मिलना बंद हो। धरना सह ज्ञापन कार्यक्रम में समाज के अगुवागण एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित हुए। जिसमें महाराजा मदरा मुंडा सेवा संस्थान न्याय ट्रस्ट के संरक्षक पहलवान मुंडा, जनजाति सुरक्षा मंच के क्षेत्रीय संयोजक संदीप उरांव, जिला परिषद सदस्य किरण देवी एवं सुषमा देवी, जय मंगल उरांव, असवानी टोप्पो उराव,परना उराँव, विश्वकर्मा पहान, कैलाश मुंडा, झालो देवी, मालती देवी, ग्राम प्रधान सतीश तिग्गा, विक्रम उरांव समाजसेवी वीरेंद्र नारायण तिवारी व अन्य सभी ने कार्यक्रम में अपनी अपनी बातें रखी। कार्यक्रम का अध्यक्षता कर रहे जनजाति सुरक्षा मंच की मीडिया प्रभारी एवं बोड़ेया पंचायत के मुखिया सोमा उरांव ने अपने कड़ा शब्दों में कहा कि जनजाति से जो धर्म परिवर्तन करके क्रिश्चियन या मुसलमान बन गए हैं वैसे लोगों को जनजाति का आरक्षण का लाभ मिलना हर हाल में अब बंद होगा ,अभी भी समय है जनजाति से धर्म परिवर्तन करके अन्य जाति में जो चले गए हैं वे स्वयं अपने मूल धर्म पूर्वजों की पूजा पाठ रीति रिवाज रूढ़ि प्रथा में वापस चले आए अन्यथा उनका लगभग तय है। क्योंकि जनजाति सुरक्षा मंच आगामी 24 मई 2026 को देश के कोने-कोने से जनजातीय सांस्कृतिक समागम, गर्जना रैली, डीलिस्टिंग रैली लाल किला मैदान में दिल्ली जाएंगे और डीलिस्टिंग करा कर ही वापस लौटेंगे।
रांची। रविवार 15 मार्च 2026 को करीब दोपहर 3:30 बजे नामकुम रोड स्थित खोरहा टोली के पास एक छोटा बच्चा लावारिस हालत में मिला। आसपास के लोगों द्वारा सूचना दिए जाने के बाद बच्चे को सुरक्षित रूप से पुलिस के पास लाया गया।
बच्चा अपना नाम रौशन कुमार बता रहा है। उसने अपने पिता का नाम पिंटू बताया है और अपना घर पिसका, नगड़ी (नगड़ी थाना क्षेत्र) की ओर बताया है। फिलहाल बच्चे को सुरक्षित रखा गया है और पुलिस उसके परिजनों की तलाश कर रही है।
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को इस बच्चे या उसके परिवार के बारे में कोई जानकारी हो, तो कृपया तुरंत सदर थाना, रांची से संपर्क करें, ताकि बच्चे को जल्द से जल्द उसके परिवार तक पहुंचाया जा सके।
बुंडू (रांची) : विभागीय निर्देश के आलोक में विश्व महिला दिवस सप्ताह के अवसर पर नगर पंचायत बुंडू द्वारा 08 मार्च से 14 मार्च 2026 तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यक्रम में महिलाओं को डोर-टू-डोर कचड़ा संग्रहण, अपशिष्ट प्रबंधन परिसंपत्तियों के रख-रखाव, कम्पोस्ट निर्माण, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) के संचालन तथा वेस्ट-टू-वेल्थ जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। इसके साथ ही डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, प्रजनन स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, कार्यस्थल सुरक्षा और उत्पाद निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को स्वच्छता प्रबंधन से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और उनकी भागीदारी को बढ़ावा देना था।
इस अवसर पर शुभम पोद्दार (प्रशासक, नगर पंचायत बुंडू), अनूप कुमार (नगर प्रबंधक), निशांत जोशी तिर्की (नगर प्रबंधक), मनीषा कुजूर (CLTC), श्री रमन गुप्ता एवं राजेश कुमार चौधरी (ब्रांड एंबेसडर, स्वच्छ भारत मिशन, नगर पंचायत बुंडू) सहित कार्यालय के सभी पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।
रांची। भारत की आगामी जनगणना 2027 की तैयारियों के अंतर्गत राँची जिला में प्रथम चरण – मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना – से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन राँची समाहरणालय, ब्लॉक-बी, कमरा संख्या 505 में दिनांक 12 मार्च 2026 से 14 मार्च 2026 तक किया गया। इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण का आज अपराह्न में सफल समापन हुआ।
यह प्रशिक्षण जनगणना कार्य निदेशालय, राँची से आए विशेष प्रशिक्षकों श्री केश्या नायक आर., उप निदेशक तथा श्री संजीव कुमार मांझी, जिला नोडल (जनगणना) द्वारा संचालित किया गया। प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को व्यावहारिक उदाहरणों, वेब पोर्टल तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना की समस्त प्रक्रियाओं का विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया। साथ ही, स्व-जनगणना (Self-Enumeration) की सुविधा के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई, जो इस जनगणना की एक प्रमुख विशेषता है।
प्रशिक्षण के दौरान जनगणना 2027 के विभिन्न चरणों, कार्यप्रणाली, डिजिटल उपकरणों (जैसे House Listing Operation Mobile App) के उपयोग तथा CMMS Web Portal पर डाटा प्रबंधन, रीयल-टाइम अपलोड, सत्यापन एवं सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहन चर्चा की गई। यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, जिसमें टैबलेट/मोबाइल आधारित ऐप के जरिए डेटा संग्रहण किया जाएगा, ताकि सटीकता, गति और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
कार्यक्रम में रामनारायण सिंह, अपर समाहर्ता, राँची, सुदर्शन मुर्मू, अपर समाहर्ता (नक्सल), कुमार रजत, अनुमंडल पदाधिकारी, सदर राँची, श्री किस्टो कुमार बेसरा, अनुमंडल पदाधिकारी, बुण्डू, संजय भगत, परियोजना निदेशक, आई०टी०डी०ए०, शेषनाथ बैठा, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, श्रीमती मनीषा तिर्की, कार्यपालक दण्डाधिकारी, रविशंकर मिश्रा, सहायक निदेशक-सह-मास्टर ट्रेनर, तथा सभी संबंधित सांख्यिकी कर्मी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी (राँची) एवं सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।
प्रशिक्षण के समापन पर शेषनाथ बैठा, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, राँची द्वारा सभी प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों एवं उपस्थित अधिकारियों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण जिला स्तर पर जनगणना की तैयारियों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण कदम है।
जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित होगी:
- प्रथम चरण: मकान सूचीकरण एवं आवास जनगणना (House Listing and Housing Census) – अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच (राज्यों द्वारा निर्धारित 30-दिवसीय अवधि में)
- द्वितीय चरण: जनसंख्या गणना (Population Enumeration) – फरवरी 2027 में (संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027)
यह जनगणना भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारी अब अपने-अपने क्षेत्रों में फील्ड कार्य के लिए तैयार हैं, जो आगामी अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले प्रथम चरण को सुचारू रूप से क्रियान्वित करने में सहायक सिद्ध होंगे।
जिला प्रशासन ने सभी प्रतिभागियों से अपील की है कि वे प्राप्त ज्ञान का उपयोग कर जनगणना प्रक्रिया को पारदर्शी, सटीक और समयबद्ध बनाएं, ताकि देश के विकास योजनाओं के लिए विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध हो सकें।
जानकारी हो की कार्यक्रम का प्रारंभ उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना पदाधिकारी, मंजूनाथ भजंत्री द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर की गई, इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जनगणना किसी भी देश के विकास के लिए योजनाओं एवं नीतियों के निर्माण करने के लिए अति महत्वपूर्ण है।
