रांची, 22 अगस्त। RKDF University, Ranchi के Faculty of Life Sciences एवं Department of Hotel Management के विद्यार्थियों ने सुधा डेयरी, HEC सेक्टर-2, धुर्वा का एक दिवसीय औद्योगिक भ्रमण किया। भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को कक्षा में अर्जित सैद्धांतिक ज्ञान से जोड़ते हुए डेयरी एवं खाद्य उद्योग की वास्तविक कार्यप्रणाली से अवगत कराना था।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने दूध की खरीद (Procurement) से लेकर प्रारंभिक गुणवत्ता जांच, Processing, Quality Control, Packaging, Storage और Marketing तक की पूरी प्रक्रिया को करीब से समझा। उन्हें बताया गया कि बड़े पैमाने पर खाद्य उत्पादन में गुणवत्ता, स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा और निर्धारित मानकों का पालन किस प्रकार किया जाता है।
Faculty of Life Sciences के विद्यार्थियों ने विशेष रूप से Food Microbiology के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी ली। उन्होंने दूध एवं दुग्ध उत्पादों में Microbial Safety, Hygiene, Quality Assurance और वैज्ञानिक परीक्षण की भूमिका को समझा। इससे उन्हें पाठ्यक्रम में पढ़े गए सिद्धांतों को वास्तविक औद्योगिक परिस्थितियों से जोड़ने का अवसर मिला।
वहीं, Hotel Management के विद्यार्थियों के लिए भी यह औद्योगिक भ्रमण उपयोगी रहा। उन्होंने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता, सुरक्षित भंडारण, पैकेजिंग, हैंडलिंग और Food Safety से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को समझा। विद्यार्थियों ने जाना कि खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखना उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि पैकेजिंग, भंडारण, वितरण और विपणन तक चलने वाली सतत प्रक्रिया है।
इस दौरान विद्यार्थियों ने औद्योगिक वातावरण में विषयों के Practical Application को प्रत्यक्ष रूप से देखा। विश्वविद्यालय के अनुसार, इस तरह के Industrial Visits विद्यार्थियों में व्यावहारिक सोच, तकनीकी समझ, निरीक्षण क्षमता, प्रोफेशनल अनुशासन और Industry Awareness विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
RKDF University विद्यार्थियों को केवल डिग्री तक सीमित रखने के बजाय उन्हें ज्ञान, कौशल और व्यावहारिक अनुभव के माध्यम से Industry-Ready Professionals बनाने की दिशा में प्रयासरत है। इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय में Industrial Visits, Practical Training, Experiential Learning और Industry Interaction जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाता है।
सुधा डेयरी का यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और अनुभव का महत्वपूर्ण अवसर रहा। भ्रमण के माध्यम से उन्हें डेयरी एवं फूड इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली के साथ-साथ भविष्य में उपलब्ध करियर अवसरों और औद्योगिक क्षेत्र में अपने विषयों के उपयोग की जानकारी भी मिली। विद्यार्थियों ने माना कि वास्तविक उद्योग का अनुभव उनके अकादमिक ज्ञान को अधिक प्रभावी और उपयोगी बनाने में सहायक है।
रांची : झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख अब छात्रों और युवाओं को ढाल बनाकर राजनीतिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही है। छात्रों के मुद्दे की आड़ में राजनीति करने वालों को झारखंड की जनता पहचान चुकी है।
विनोद पांडेय ने आरोप लगाया कि भाजपा और उससे जुड़े राजनीतिक हित रखने वाले लोग तथा कुछ कोचिंग माफिया छात्रों को उकसाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं के समाधान के बजाय उन्हें आंदोलन और टकराव की राजनीति में धकेलना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। भाजपा नेताओं को बताना चाहिए कि वे छात्रों के हित में समाधान चाहते हैं या उन्हें अपनी राजनीतिक लड़ाई का मोहरा बनाना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी पहले इस बात का जवाब दें कि छात्रों के बीच जाकर उन्हें भड़काने और राजनीतिक नारों में उलझाने से उनके भविष्य का क्या भला होगा? यदि वास्तव में छात्रों की चिंता है तो उनके मुद्दों पर सरकार से बातचीत करें, तथ्य सामने रखें और समाधान का रास्ता सुझाएं। छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करना न तो छात्रहित है और न ही लोकतांत्रिक राजनीति।
झामुमो महासचिव ने कहा कि बिना किसी ठोस प्रमाण के झामुमो कार्यकर्ताओं को बदनाम करना बाबूलाल मरांडी की हताश राजनीति का परिचायक है। यदि कहीं किसी के साथ मारपीट हुई है या कानून का उल्लंघन हुआ है तो पुलिस-प्रशासन निष्पक्ष जांच करे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन जांच से पहले ही राजनीतिक फैसला सुनाना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन कर रही है या आगामी राजनीतिक लाभ के लिए युवाओं के बीच असंतोष को हवा दे रही है। झारखंड के छात्र किसी राजनीतिक दल के मोहरे नहीं हैं। उन्हें अपने भविष्य, रोजगार और शिक्षा की चिंता है; भाजपा को उनके भविष्य से खिलवाड़ करने के बजाय अपनी राजनीति सुधारनी चाहिए।
विनोद पांडेय ने कहा कि कोचिंग संस्थानों और शिक्षा के नाम पर कारोबार करने वाले किसी भी समूह को छात्रों की भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यदि किसी को छात्रों की वास्तविक चिंता है तो वह उनके बीच भ्रम और आक्रोश फैलाने के बजाय उन्हें सही तथ्य और उचित मार्गदर्शन दे।
उन्होंने कहा कि झामुमो छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करता है और किसी भी शांतिपूर्ण आंदोलन के अधिकार के खिलाफ नहीं है। लेकिन आंदोलन के नाम पर हिंसा, उकसावे या राजनीतिक टकराव को बढ़ावा देने का समर्थन नहीं किया जा सकता। कानून अपना काम करेगा और यदि किसी ने कानून हाथ में लिया है तो उसकी जांच होनी चाहिए।
विनोद पांडेय ने बाबूलाल मरांडी पर निशाना साधते हुए कहा कि आपको छात्रों की चिंता कम और अपनी राजनीतिक जमीन की चिंता ज्यादा है। छात्र आंदोलन को राजनीतिक प्रयोगशाला बनाने की कोशिश बंद कीजिए। झारखंड के युवा समझदार हैं और वे तय करेंगे कि उन्हें अपने भविष्य के लिए संघर्ष करना है या भाजपा की राजनीतिक पटकथा का हिस्सा बनना है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार युवाओं के हित में लगातार काम कर रही है। भाजपा को यदि कोई ठोस सुझाव देना है तो सरकार के सामने रखे। लेकिन छात्रों को भड़काकर, माहौल खराब करके और फिर उसकी राजनीतिक रोटी सेंकने की कोशिश झारखंड में सफल नहीं होगी।
विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा और उसके सहयोगी तत्व यह समझ लें कि झारखंड के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। युवाओं को उकसाने की राजनीति का जवाब तथ्य, संवाद और कानून के रास्ते से दिया जाएगा सड़क पर अराजकता पैदा करके नहीं।
सिल्ली (मूरी)। रूडसेट संस्थान, सिल्ली में शुक्रवार को 30 दिवसीय एलएमवी (लाइट मोटर व्हीकल) ओनर ड्राइवर प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस प्रशिक्षण में कुल 29 प्रशिक्षुओं ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त किया।इसी अवसर पर संस्थान में 30 दिवसीय टू-व्हीलर मैकेनिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया, जिसमें 23 प्रशिक्षु भाग ले रहे हैं। साथ ही 12 दिवसीय बकरी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम की भी शुरुआत हुई, जिसमें 28 प्रशिक्षु प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।समापन एवं उद्घाटन समारोह की मुख्य अतिथि राँची जिला परिषद की उपाध्यक्ष वीणा चौधरी थीं। उन्होंने एलएमवी चालक प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रशिक्षुओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने नए प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल प्रतिभागियों को स्वरोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया तथा प्रशिक्षण से अर्जित ज्ञान और कौशल का उपयोग कर आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया।संस्थान के निदेशक श्री सुदीप शिशिर एक्का ने कहा कि वर्तमान समय में कौशल विकास और स्वरोजगार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ देते हुए नए प्रशिक्षुओं से लगन, अनुशासन और गंभीरता के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करने का आह्वान किया।कार्यक्रम में संस्थान के वरिष्ठ संकाय रंजीत कर्ण, दशरथ महतो, सुनील मुंडा, ईडीपी असेसर विवेकानंद भगत, एलएमवी चालक प्रशिक्षण के प्रशिक्षक श्री बबलू कुमार तथा टू-व्हीलर मैकेनिक प्रशिक्षण के प्रशिक्षक श्री रामाशंकर सहित अन्य गणमान्य लोग एवं प्रशिक्षु उपस्थित रहे।समारोह के दौरान प्रशिक्षुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। सभी प्रतिभागियों ने कौशल विकास एवं स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। गौरतलब है कि रूडसेट संस्थान, सिल्ली द्वारा ग्रामीण युवाओं को कौशल विकास, उद्यमिता और स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से समय-समय पर विभिन्न रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
रांची। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों का आक्रोश शुक्रवार को एक बार फिर सड़क पर देखने को मिला। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला फूंकने के दौरान रांची में छात्रों और पुलिस के बीच झड़प की स्थिति बन गई। घटना के बाद मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा।
आंदोलनकारी छात्र मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ पुतला दहन करने अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प हो गई। मिली जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान एक युवक द्वारा पुतला दहन रोकने की कोशिश के बाद एक युवक द्वारा एक लड़की के साथ मारपीट कर दी जिसके बाद छात्रों का संगठन और पुलिसकर्मी आमने-सामने आ गए।
छात्र जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया तथा सीबीआई जांच समेत अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। शुक्रवार को राज्य के विभिन्न जिलों में मुख्यमंत्री का पुतला दहन करने का आह्वान किया गया था।
इससे पहले भी रांची में आंदोलनकारी छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाकर सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जताया था। छात्रों का आरोप है कि उन्हें लगातार आश्वासन दिए गए, लेकिन उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
घटना के बाद रांची में छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। वहीं, पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। फिलहाल आंदोलनकारी छात्रों की ओर से प्रदर्शन जारी रखने की बात कही गई है।
रांची। नशीले मादक पदार्थों की अवैध खरीद-बिक्री के खिलाफ रांची पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। रातू थाना क्षेत्र में पुलिस ने छापेमारी कर प्रतिबंधित कफ सिरप की बड़ी खेप के साथ तीन कथित तस्करों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 100 एमएल की 570 बोतल WINGS ONEREX CODINE COUGH SYRUP और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार, 20 अगस्त को वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची को गुप्त सूचना मिली थी कि रातू थाना क्षेत्र के रिंग रोड स्थित हाजी चौक के आसपास कुछ लोगों द्वारा प्रतिबंधित कफ सिरप की ऊंचे दामों पर अवैध खरीद-बिक्री की जा रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के निर्देशन में पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय)-II अजय आर्यन के नेतृत्व में विशेष छापामारी दल का गठन किया गया।
सुनसान जगह पर चल रही थी डिलीवरी की तैयारी
गठित टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रातू थाना क्षेत्र के फुटकल टोली, बोस नगर स्थित केयरिंग हैंड्स हॉस्पिटल के पास एक सुनसान जगह पर छापेमारी की। पुलिस के मुताबिक, मौके पर तीन संदिग्ध व्यक्ति पांच कार्टून में रखे 100 एमएल के कुल 570 कफ सिरप की बोतलों के साथ डिलीवरी के लिए रुके हुए थे।
पुलिस टीम ने घेराबंदी कर तीनों को पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने रांची के अलग-अलग इलाकों में प्रतिबंधित कफ सिरप को ऊंचे दामों पर बेचने की बात स्वीकार की। पुलिस ने बरामद कफ सिरप को विधिवत जब्त कर लिया है और आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की कार्रवाई की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान वहाजुल अंसारी (32), पिता निजाम मियां, निवासी जिपुवा मुरपा, थाना बालूमाथ, जिला लातेहार; शहनवाज अंसारी (29), पिता सफीक अंसारी, निवासी हाजी चौक सिमलिया, थाना रातू, रांची; तथा नईम अंसारी (29), पिता स्वर्गीय फिरोज अंसारी, निवासी फुटकल टोली, सिमलिया, थाना रातू, रांची, स्थायी पता मेलाटांड़, थाना एवं जिला खूंटी के रूप में हुई है।
570 बोतल कफ सिरप और तीन मोबाइल जब्त
छापेमारी के दौरान पुलिस ने WINGS ONEREX CODINE COUGH SYRUP की 100 एमएल की 570 बोतलें तथा तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। मामले में रातू थाना कांड संख्या 279/26, दिनांक 20 अगस्त 2026, धारा 317(5) बीएनएस एवं 21(C) एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस का कहना है कि नशीले पदार्थों की अवैध खरीद-बिक्री के कारण विशेष रूप से युवाओं पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को देखते हुए ऐसे कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
कई पुलिस पदाधिकारी रहे छापेमारी टीम में शामिल
कार्रवाई में पुलिस उपाधीक्षक अजय आर्यन के अलावा दलादली ओपी प्रभारी सत्य प्रकाश उपाध्याय, ठाकुर गांव थाना प्रभारी शुभम कुमार, पुंदाग टीओपी प्रभारी संजीव कुमार, संदीप राज, छोटु कुमार, विनित कुमार और महेश प्रसाद कुशवाहा सहित रातू थाना के सशस्त्र बल के जवान शामिल रहे।
रांची। हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (HEC), रांची के पुनरुद्धार को लेकर शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में महत्वपूर्ण बैठक हुई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से HEC के पुनरुद्धार के लिए गठित छह सदस्यीय केंद्रीय संसदीय उप-समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस दौरान HEC की वर्तमान स्थिति और संस्थान को फिर से मजबूत करने को लेकर भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल के साथ HEC की मौजूदा परिस्थितियों, संस्थान के सामने मौजूद चुनौतियों और इसके पुनरुद्धार की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। बैठक में HEC को नई दिशा देने तथा उसके भविष्य को लेकर आवश्यक कदमों पर चर्चा हुई।
प्रतिनिधिमंडल में सांसद विजय हांसदा, केंद्रीय संसदीय उप-समिति के अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद तिरुची शिवा, राज्यसभा सांसद सुलता देव, सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी, सांसद हँसमुखभाई सोमाभाई पटेल तथा सांसद चंदन चौहान शामिल रहे।
HEC के भविष्य को लेकर अहम मानी जा रही मुलाकात
रांची स्थित HEC झारखंड ही नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला सार्वजनिक क्षेत्र का प्रतिष्ठित संस्थान रहा है। ऐसे में इसके पुनरुद्धार को लेकर केंद्र और राज्य स्तर पर होने वाली पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
केंद्रीय संसदीय उप-समिति के प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद HEC के पुनरुद्धार से जुड़ी आगे की रणनीति को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। बैठक में हुई चर्चा को संस्थान के पुनरुद्धार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
रांची। झारखंड रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (झारखंड रेरा) की ओर से रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन और इसके व्यावहारिक पहलुओं को लेकर 23 अगस्त 2026 को रांची में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। सेमिनार का आयोजन रेडिसन ब्लू होटल, रांची में सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक होगा।
सेमिनार का उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारकों को रेरा अधिनियम के प्रावधानों और नियामकीय प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा परियोजना पंजीकरण, प्रमोटर एवं आवंटियों के अधिकार और दायित्व, अनुपालन प्रक्रिया, वित्तीय प्रबंधन तथा शिकायत निवारण व्यवस्था समेत अधिनियम के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया जाएगा।
व्यावहारिक समस्याओं पर होगी चर्चा
कार्यक्रम के दौरान इंटरैक्टिव सत्र का भी आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रतिभागी रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े अपने व्यावहारिक सवाल और जिज्ञासाएं विशेषज्ञों के सामने रख सकेंगे। विशेषज्ञ इन सवालों का समाधान करते हुए रेरा अधिनियम के प्रावधानों और उनके अनुपालन से जुड़ी आवश्यक जानकारी देंगे।
बिल्डर से लेकर होमबायर्स तक की भागीदारी की अपील
झारखंड रेरा ने बिल्डरों, प्रमोटरों, भूमि स्वामियों, होमबायर्स, बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों सहित रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों से सेमिनार में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।
प्राधिकरण का मानना है कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से रियल एस्टेट क्षेत्र में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत करने में मदद मिलेगी।
झारखंड रेरा के अनुसार, रेरा अधिनियम के प्रावधानों की सही जानकारी और प्रभावी अनुपालन से रियल एस्टेट परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा प्रमोटरों और आवंटियों के बीच उत्पन्न होने वाली समस्याओं के समाधान में भी मदद मिलेगी।
मुरी: आगामी श्री श्री राधारमण महामहोत्सव 2026 के उपलक्ष्य में शुक्रवार को ग्राम विकास मोड़ से मुरी तक भव्य नगर संकीर्तन का आयोजन किया गया। हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन एवं भगवान श्रीकृष्ण के पवित्र नाम के संकीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।नगर संकीर्तन में भक्तिवेदांत विद्याभवन गुरुकुल के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन एवं मार्गदर्शन आचार्य सुबाल प्रभु, करुणावतार प्रभु, भद्रांग प्रभु, भागवत प्रभु, स्तोक कृष्ण प्रभु एवं शचीसुत प्रभु के निर्देशन में किया गया।आयोजकों ने बताया कि नगर संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य आगामी श्री श्री राधारमण महामहोत्सव 2026 के प्रति जन-जागरण करना तथा अधिक से अधिक लोगों को भगवान श्रीकृष्ण के पवित्र नाम एवं भक्ति से जोड़ना है। यह महामहोत्सव 28 अगस्त से 5 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा।नगर संकीर्तन में विद्यार्थियों, आचार्यों एवं श्रद्धालु भक्तों की उत्साहपूर्ण सहभागिता से पूरे मार्ग में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से आगामी महामहोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में सहभागी होकर भगवान श्री श्री राधारमण के दर्शन, सेवा एवं आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया।
रांची। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसके तहत JSSC-CGL और CDPO परीक्षा के परिणाम/नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश दिया गया था। हाईकोर्ट के इस फैसले से इन परीक्षाओं के जरिए चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।
राज्य सरकार ने हाल ही में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं की जांच के आधार पर कई परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था। इसी क्रम में JSSC-CGL परीक्षा और CDPO भर्ती भी रद्द करने का आदेश जारी किया गया था। सरकार के इस फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों में भारी असंतोष था और वे अपनी नियुक्तियों को बचाने के लिए न्यायालय की शरण में पहुंचे थे।
हाईकोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक
शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार के रद्दीकरण संबंधी आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए चयनित अभ्यर्थियों को तत्काल राहत दी। अदालत ने सरकार से इस मामले में जवाब भी मांगा है। रिपोर्टों के अनुसार अगली सुनवाई 24 अगस्त को होने की बात सामने आई है।
अदालत की इस कार्रवाई का अहम पहलू यह है कि जिन अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास कर नियुक्ति हासिल की थी, उनकी नियुक्ति को केवल व्यापक जांच के आधार पर समाप्त करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। हाईकोर्ट की कार्यवाही में प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांत को महत्वपूर्ण माना गया है।
करीब दो हजार चयनित अभ्यर्थियों को राहत
JSSC-CGL को लेकर सरकार के रद्दीकरण आदेश के बाद करीब 2,000 चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य पर अनिश्चितता पैदा हो गई थी। अभ्यर्थियों का कहना था कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषी व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों को एक साथ दोषी मानकर उनकी नौकरी खत्म करना उचित नहीं है।
वहीं CDPO भर्ती के चयनित अभ्यर्थियों को भी हाईकोर्ट के आदेश से राहत मिली है। एक रिपोर्ट के अनुसार JSSC-CGL और CDPO भर्ती के जरिए चयनित कुल 1,932 अभ्यर्थियों को इस न्यायिक हस्तक्षेप से तत्काल राहत मिली है।
सरकार के फैसले के बाद बढ़ा था विवाद
झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर व्यापक कार्रवाई का फैसला लिया था। सरकार ने JSSC-CGL समेत कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और पुरानी परीक्षाओं की जांच कराने की घोषणा की थी। इसके बाद एक तरफ परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे आंदोलनकारी छात्रों में संतोष दिखा, तो दूसरी तरफ पहले से चयनित अभ्यर्थियों ने नौकरी बचाने के लिए आंदोलन और कानूनी लड़ाई शुरू कर दी।
अब हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद मामला पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में आ गया है। सरकार को अदालत के सामने अपना पक्ष और रद्दीकरण के आधार स्पष्ट करने होंगे। अंतिम फैसला आने तक JSSC-CGL और CDPO से जुड़े चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।
छात्रों और चयनित अभ्यर्थियों के बीच फिर बढ़ सकता है टकराव
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद भर्ती परीक्षा विवाद का अगला चरण और महत्वपूर्ण हो गया है। एक ओर परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच और निष्पक्ष भर्ती की मांग करने वाले छात्र संगठन हैं, वहीं दूसरी ओर वर्षों की मेहनत के बाद चयनित होकर नौकरी पाने वाले अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई और सरकार के जवाब पर टिकी हैं। हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि JSSC-CGL और CDPO नियुक्तियों को लेकर आगे की कानूनी स्थिति क्या बनती है। फिलहाल इतना साफ है कि सरकार के रद्दीकरण आदेश पर लगी हाईकोर्ट की रोक ने हजारों चयनित अभ्यर्थियों को तत्काल बड़ी राहत दी है।
रांची। झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा के चयनित अभ्यर्थियों को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियां रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अदालत ने मामले में राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जवाब भी मांगा है।
नियुक्तियां रद्द किए जाने के खिलाफ दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और पीएएस पति ने पक्ष रखा।
342 चयनित अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत
11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा, विज्ञापन संख्या 1/2024 के तहत 342 पदों पर अभ्यर्थियों का चयन किया गया था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी जारी किया गया और वे प्रशिक्षण एवं सेवा प्रक्रिया में शामिल हो चुके थे।
सरकार की ओर से 18 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना के बाद इन नियुक्तियों पर संकट खड़ा हो गया था। अब हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद चयनित अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है।
दूसरी नौकरी छोड़कर झारखंड आई थीं सोनम कुमारी
याचिकाकर्ता सोनम कुमारी ने अदालत को बताया कि उन्होंने दूसरी जगह की नौकरी छोड़कर झारखंड में नियुक्ति स्वीकार की थी। उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था और उन्होंने प्रशिक्षण भी पूरा किया। इसके बाद 18 अगस्त 2026 की सरकारी अधिसूचना के जरिए उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई।
याचिका में कहा गया कि चयन प्रक्रिया पूरी होने और सेवा में शामिल होने के बाद अचानक नियुक्ति रद्द किए जाने से उनके करियर और भविष्य पर गंभीर असर पड़ा है।
फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति पर भी रोक
तीसरी याचिका सौरव सिंह एवं अन्य की ओर से दायर की गई थी। इसमें JPSC की विज्ञापन संख्या 18/2023 के तहत आयोजित फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के फैसले को चुनौती दी गई।
हाईकोर्ट ने इस मामले में भी नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगाते हुए राज्य सरकार और JPSC को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
CID जांच के बाद सरकार ने लिया था नियुक्तियां रद्द करने का फैसला
JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार ने जांच का फैसला लिया है। CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सरकार ने उन परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया, जिनमें TDPL की भूमिका सामने आने की बात कही गई है।
इसके अलावा वर्ष 2014 से अब तक आयोजित भर्ती परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की भी जांच कराई जा रही है। कार्मिक विभाग की अधिसूचना के अनुसार कुल 45 परीक्षाओं को जांच एवं कार्रवाई के दायरे में रखा गया है। इनमें 22 परीक्षाएं रद्द, छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित और 17 परीक्षाओं को संभावित अनियमितताओं की जांच के दायरे में रखा गया है।
अब अगली सुनवाई पर टिकी नजर
सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है। वहीं चयनित अभ्यर्थियों का तर्क है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन पूरी चयन प्रक्रिया में सफल अभ्यर्थियों को सामूहिक रूप से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल हाईकोर्ट का आदेश अंतरिम है। नियुक्तियां रद्द करने के सरकार के फैसले पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। राज्य सरकार और JPSC को अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद अदालत मामले के कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर आगे सुनवाई करेगी। ऐसे में चयनित अभ्यर्थियों के साथ-साथ पूरे राज्य की नजर अब हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है।
