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रांची। नगड़ी थाना अंतर्गत दिनांक 08.05.2026 को समय-19:20 बजे गुप्त सूचना प्राप्त हुई की कोलांबी गॉव में एक जमीन विवाद को लेकर अनुप कुमार एवं उनके सहयोगी के द्वारा फायरिंग की घटना को अंजाम दिया गया जिसके संबंध में सन्हा दर्ज कर वरीय पदाधिकारी को सूचित किया।
उक्त सूचना के सत्यापन एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु वरीय पुलिस अधीक्षक, राँची के द्वारा पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, राँची के निर्देशन में श्री अरविन्द कुमार सिंह, पुलिस उपाधीक्षक, मु० द्वितीय राँची के नेतृत्व में एक छापामारी दल का गठन किया गया। छापामारी दल द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए ग्राम तुसमों पहुँचे तथा संदेही अनुप कुमार, पिता शिव नाथ गोप के घर में छापामारी कर पुछ-ताछ हेतू हिरासत में लिया गया। दिनांक-07.05.2026 को हुये घटना के संबंध में पुछ-ताछ करने पर इनके द्वारा अपना अपराध स्वीकार किया गया तथा बताया गया कि फायरिंग करने के बाद दो पिस्टल एवं बचे हुये कारतुस को अपने दोस्त रमेश गोप के घर में छुपाकर रख दिये है। छापामारी दल के द्वारा गॉव तुसमों स्थित रमेश गोप के घर में छापामारी कर रमेश गोप एवं इनके एक अन्य सहयोगी प्रताप गोप को पकड़ कर हथियार के संबंध में पुछ-ताछ किया गया। पुछ-ताछ के दौरान इनके निशानदेही पर इनके घर से कांड में प्रयुक्त 02 पिस्टल, 13 राउण्ड जिंदा कारतुस एवं 03 खोखा बरामद किया गया। बरामद हथियार के संबंध में वैध कागजात की माँग करने पर इनके द्वारा कोई कागजात प्रस्तुत नही किया गया, तत्पश्चात हथियार गोली को विधिवत जप्ती सूची तैयार कर जप्त किया एवं अभियुक्त 1. अनुप कुमार, 2. रमेश गोप एवं 3. प्रताप गोप, को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजी जा रही है।
छापामारी में गिरफ्तार अभियुक्त का नाम पता :-
1. अनुप कुमार, पिता शिव नाथ गोप, सा०-तुसमों पो०-सपारोम थाना-नगड़ी, जिला राँची।
2. रमेश गोप, पिता स्व० छोटन गोप, ग्राम-तुसमो, पो०-सपारोम थाना नगड़ी, जिला राँची।
3. प्रताप गोप, पिता महेश्वर गोप, सा०-तुसमो, थाना-नगड़ी, जिला राँची
छापामारी में बरामदगीः-
(1) पिस्टल (MADE IN USA)-
(2) पिस्टल (MADE IN V)-
(3) जिंदा कारतुस-
(4) कारतूस का खोखा-
13 (तेरह) राउण्ड
03 (तीन)
छापामारी दल का सदस्यः-
01
01
1. पु०अ०नि० प्रवीण कुमार, थाना प्रभारी नगड़ी थाना।
2. स०अ०नि० संजय कुमार सिंह, नगड़ी थाना।
3. स०अ०नि० कुलदेव प्रसाद साह, नगडी थाना।
4. हव० 162 दिलीप ठाकुर, नगड़ी थाना रिजर्व गार्ड।
5. हव0 535 निर्मल उराँव, नगडी थाना रिजर्व गार्ड।
6. आरक्षी 2791 विमल कुमार हेम्ब्रम, नगड़ी थाना रिजर्व गार्ड।
7. आरक्षी 2690 ललन सिहं, नगडी थाना रिजर्व गार्ड।
रांची: आगामी 24 मई 2026, रविवार को लाल किला मैदान, नई दिल्ली में आयोजित होने वाले जनजातीय सांस्कृतिक समागम सह गर्जना महारैली को लेकर शनिवार, 9 मई 2026 को सरहुल पूजा स्थल, सेक्टर-3 एन टाइप धूमकुड़िया भवन प्रांगण, धुर्वा में विभिन्न सामाजिक संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मेघा उरांव ने की।
बैठक को संबोधित करते हुए मेघा उरांव ने बताया कि “दिल्ली चलो” अभियान के तहत प्रत्येक प्रखंड में बाइक रैली, दीवार लेखन एवं प्रत्येक मौजा में देव पूजन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसी क्रम में 16 मई 2026, शनिवार को रांची के बिरसा चौक से बाइक रैली निकाली जाएगी, जिसका समापन मोराबादी स्थित बापू वाटिका में होगा।
उन्होंने आगे बताया कि अपनी मांगों की पूर्ति एवं कार्यक्रम की सफलता के लिए 19, 20 और 21 मई को सभी मौजा, गांव एवं प्रखंड स्तर पर एक साथ देव पूजा का आयोजन किया जाएगा।
क्षेत्रीय संयोजक संदीप उरांव ने कहा कि जनजातियों के अस्तित्व, अस्मिता, हक-अधिकार एवं धर्म की रक्षा के उद्देश्य से रांची से दो विशेष ट्रेनें रिजर्व की गई हैं। उन्होंने बताया कि पूरे देशभर से भी ट्रेनों की बुकिंग की जा रही है और अब तक लगभग 75 हजार लोगों के दिल्ली जाने का टिकट बुक हो चुका है। इसके अलावा निजी वाहन, बसों एवं अन्य साधनों से भी हजारों लोग दिल्ली पहुंचेंगे।
बैठक में अंजलि लकड़ा, पिंकी खोया, बबलू मुंडा (केंद्रीय सरना समिति), महासचिव अशोक मुंडा, सोमा उरांव, डॉ. बिरसा उरांव, जय मंत्री उरांव, शनि उरांव, साजन मुंडा, विकास उरांव, रिंकू महली, राजन, पूजा महली, विश्वकर्मा पहान, राजू उरांव, बबलू उरांव, कामेश्वर, दीनबंधु, संदीप, डोली, रवि महली समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
रांची। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कांके रोड रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में रांची के सात वर्षीय बाल तैराक इशांक सिंह ने मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने तैराक इशांक सिंह को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए उन्हें अपनी ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी तथा उज्जवल भविष्य की कामना की। मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने सात वर्षीय बाल तैराक इशांक सिंह को उनके प्रभावशाली प्रदर्शन के लिए उन्हें 5 लाख रुपए का चेक, स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि रांची के इशांक सिंह ने विगत 30 अप्रैल 2026 के दिन लगातार 9 घंटे 50 मिनट तैरकर भारत और श्रीलंका के बीच स्थित चुनौतीपूर्ण पाल्क स्ट्रेट (palk Strait, 29 किलोमीटर) को पार करते हुए अपने नाम विश्व रिकॉर्ड दर्ज किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए इशांक सिंह को कई विभिन्न खिताबों से सम्मानित किया गया है।
इशांक सिंह ने अपने प्रदर्शन से राज्य का नाम रोशन किया
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि बाल तैराक ईशान सिंह ने पाक स्ट्रेट पार कर देश और दुनिया में झारखंड प्रदेश का नाम रोशन कर दिखाया है। मौके पर मुख्यमंत्री ने इशांक सिंह के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि तैराकी के क्षेत्र में इनकी सफलता पूरे राज्य के लिए गौरव का क्षण रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। झारखंड में हमारी सरकार ने एक बेहतर खेल नीति बनाई है, जिसका लाभ यहां के खिलाड़ियों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा झारखंड के खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं एवं आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने विश्वास व्यक्त किया कि सात वर्षीय बाल तैराक इशांक सिंह भविष्य में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर झारखंड का मान बढ़ाएंगे।
प्रतिभाशाली बच्चों को बेहतर प्लेटफॉर्म मिले इस निमित्त राज्य सरकार उन्हें हर संभव मदद करेगी
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि बाल तैराक इशांक सिंह कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। इनकी सफलता राज्य के अन्य खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के भीतर इशांक सिंह जैसे प्रतिभाशाली बच्चों को बेहतर प्लेटफॉर्म मिले इस निमित्त राज्य सरकार उन्हें हर संभव मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा खेल के क्षेत्र में झारखंड प्रदेश निरंतर विकास कर रहा है। यहां के खेल प्रतिभाओं ने कई मौकों पर पूरे विश्व अपना लोहा मनवाया है। झारखंड के खिलाड़ी अपने कठिन परिश्रम, अनुशासन और लगन के बल पर नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहे हैं। राज्य के युवा खिलाड़ियों की उपलब्धियां आने वाली पीढ़ी को और ऊर्जावान बनाएगी।
मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने उपस्थित पदाधिकारियों से कहा कि आने वाले दिनों में तैराकी प्रशिक्षण सहित सभी सुविधाओं के विस्तार हेतु कार्य योजना बनाते हुए राज्य सरकार आगे बढ़ेगी तथा राज्य में तैराकी प्रतिभावों को आधुनिक सुविधा प्रदान करेगी। मौके पर मुख्यमंत्री ने वर्तमान समय में तैराकी से संबंधित सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं की जानकारी उपस्थित खेल विभाग के अधिकारियों से ली। मौके पर मुख्यमंत्री ने इशांक सिंह की माता, पिता तथा कोच को भी सम्मानित किया।
इस अवसर पर राज्य के पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, खेल विभाग के सचिव मुकेश कुमार, निदेशक खेल आसिफ इकराम, उप निदेशक राजेश कुमार, तैराकी संघ से शैलेंद्र तिवारी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्यपाल आर एन रवि द्वारा पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल को भंग किए जाने के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कार्यकाल समाप्त हो गया है और अब राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को बंगाल की राजनीति का बड़ा मोड़ माना जा रहा है। राज्यपाल के इस कदम के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर कई अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, नई सरकार के गठन को लेकर जल्द ही भाजपा राजनीतिक दल की बैठकों का दौर शुरू होने वाला है जहां 8 मई को विधायक दल का नेता चुना जाना है। भाजपा इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
रांची: रातू थाना क्षेत्र के मालमाडु गांव में सड़क विवाद के दौरान मारपीट और लाइसेंसी राइफल छीनने के मामले में रांची पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस कांड का 24 घंटे के भीतर खुलासा कर सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही छीनी गई 0.315 बोर की लाइसेंसी राइफल और घटना में प्रयुक्त पिकअप वैन भी बरामद कर ली गई है।
पुलिस के अनुसार, 5 मई 2026 को मालमाडु गांव में तारूप जाने वाली सड़क पर महिंद्रा XUV में सवार सतीश कुमार और उनके सहयोगी की सामने से आ रहे पिकअप वैन पर सवार लोगों से रास्ता नहीं देने और लाइट डिम नहीं करने को लेकर कहासुनी हो गई थी। देखते ही देखते विवाद हिंसक झड़प में बदल गया, जिसमें सतीश कुमार और उनके सहयोगी गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों का इलाज फिलहाल मेडिका अस्पताल में चल रहा है।
घटना के दौरान आरोपियों ने सतीश कुमार की लाइसेंसी 0.315 बोर राइफल भी छीन ली थी। मामले को लेकर रातू थाना कांड संख्या-147/2026 दर्ज किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक रांची के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के नेतृत्व में विशेष छापामारी दल का गठन किया गया। टीम ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए ग्राम मुरचू समेत विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर सभी सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपी:
सतीश उरांव, सुखनाथ गोप, दासुवा उरांव, रंजीत गोप, सोमरा उरांव, विपिन उरांव और बबलू अहीर।
बरामदगी:
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
इस सफल कार्रवाई में पुलिस उपाधीक्षक, थाना प्रभारियों और रातू थाना सशस्त्र बल की अहम भूमिका रही।
रांची। जनजाति सुरक्षा मंच के मीडिया प्रभारी सोमा रउरांव ने मुख्यमंत्री झारखंड सरकार, एवं उपायुक्त रांची को शहीद बिरसा मुंडा को न्याय दिलाने हेतु पत्र लिखा है ।हाल ही में 24 अप्रैल 2026 को जगन्नाथपुर मंदिर परिसर में ड्यूटी के दौरान सुरक्षा कर्मी बिरसा मुंडा की दुखद हत्या की घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। इस अमानवीय घटना से उनके परिवार पर गहरा दुख एवं आर्थिक संकट आ पड़ा है। विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं प्रतिनिधिमंडलों द्वारा भी इस मामले में न्याय एवं सहयोग की मांग की गई है।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि—
1. शहीद बिरसा मुंडा के परिवार के कम से कम दो सदस्यों को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
2. परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए 50 लाख (पचास लाख रुपये) का मुआवजा तत्काल प्रदान किया जाए।
3. दोषियों को शीघ्र एवं कठोरतम सजा दिलाने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
4. मंदिर परिसर के आसपास झोपड़ी में रह रहे सभी गरीब परिवारों को साहू ग्रुप के माध्यम से पक्का मकान उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन जी सकें।महोदय, यह सहायता न केवल पीड़ित परिवार को संबल देगी, बल्कि समाज में न्याय और विश्वास को भी मजबूत करेगी तथा क्षेत्र के गरीब परिवारों के जीवन स्तर में भी सुधार लाएगी।अतः आपसे पुनः निवेदन है कि इस विषय में सहानुभूतिपूर्वक एवं शीघ्र निर्णय लेने की कृपा करें।
रांची। जनजाति सुरक्षा मंच के मीडिया प्रभारी सोमा उरांव ने प्रेस बयान जारी कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी से पूछा कि क्या सरना धर्म कोड मिलने से आदिवासियों को संविधान में लिखा 26 अनुच्छेदों में जो हक अधिकार प्राप्त है वह बरकरार रहेगा इस बाबत आप कैबिनेट से एक चिट्ठी निर्गत करें कि सरना धर्मकोड मिलने से 26 अनुच्छेदों से मिलने वाले हक अधिकार मिलते रहेंगे चूंकि सरना धर्म कोड की मांग चर्च की मांग है जिस दिन यह कोड मिल जाता है सभी जनजाति अल्पसंख्यक हो जाएंगे और 26 अनुच्छेदों का हक अधिकार छिन जाएगा। सन 1945 में चाईबासा की जगन्नाथपुर धर्म सम्मेलन में सर्वप्रथम सरना की बात आई वहीं से धीरे-धीरे सरना का प्रचलन हुआ, लोगों की मांग को देखते हुए सन 2013 में माननीय पूर्व सांसद सुदर्शन भगत जी ने सरना धर्म कोड की मांग की l केंद्र से जवाब आया यह संभव नहीं है। 2015 में पूर्व विधायक एवं मंत्री माननीय देव कुमार धान जी ने भी सरना धर्म कोड की मांग की, केंद्र से जवाब आया यह संभव नहीं है क्योंकि 105 छोटे-छोटे पथ अलग-अलग कोड की मांग कर रहे हैं यदि सभी को अलग-अलग कोड दिया जाए तो भारत टुकड़े-टुकड़े में बट जाएगा और इसी प्रकार समय बिता गया और वर्ष 2020 में चर्च की मांग पर विशेष सत्र बुलाकर आनन फानन में विधानसभा से सरना धर्मकोड आदिवासी/ धर्मकोड को पारित कर बिना महामहिम के हस्ताक्षर कराए सीधे दिल्ली भेज देना संविधान को हनन करते हुए लोगों के साथ छल करना और यह कहना कि आप सरना कोड मांग किया हमने पारित कर केंद्र भेजा ,अब केंद्र नहीं माना तो मैं क्या करूं पुनः लोगों को 2025 में यह कहना कि सरना धर्मकोड को पास कर राज्यपाल से हस्ताक्षर कराकर केंद्र भेजेंगे फिर वही छल की हम सरना धर्म कोड के लिए महामहिम एवं राज्यपाल को चिट्ठी लिखे हैं कि जनगणना में अलग सरना धर्म तालिका होना चाहिए जबकि भारत की सभी जनजातियों के लिए हिंदू धर्म के अभिन्न अंग या श्रेणी में होने का कारण हिंदू धर्म के अंतर्गत रखा है और सभी जनजाति हिंदू है जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 13, 17 ,25 ,340, 341 342, में हिंदू कहा गया है जिसके अंतर्गत निम्नलिखित कानून बनाए गए हैं 1. सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम1955
2 हिंदू विवाह अधिनियम 1955
3 हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956
4. हिंदू आप प्राप्त व्याप्त एवं संरक्षता अधिनियम 1956
5. हिंदू दत्तक पुत्र एवं भरण पोषण अधिनियम 1956
6. अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989
7. पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार अधिनियम 1996
8. राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित बीपी मंडल आयोग प्रतिवेदन अधिनियम 1990
9. झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2001
जो सभी जनजाति हिंदू होते हुए भी अपनी अपनी रीति रिवाज कस्टम रूढ़ि प्रथा से फॉलो होते हैं ।क्योंकि संविधान में सरना, आदिवासी ,आदि, एवं सनातन धर्म अंकित नहीं है इसलिए जनगणना हो रहा है कॉलम में धर्म के स्थान पर ईसाई मुस्लिम को छोड़कर सभी लोगों से हिंदू लिखने का आग्रह किया विशेष कर जनजाति समाज से आग्रह करते हुए कहा कि अपना अपना हक अधिकार एवं बच्चों के भविष्य नौकरी को देखते हुए हिंदू ही लिखे अन्य दूसरा कोई नहीं लिखे ।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति से बड़ी खबर सामने आ रही है, भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ आगे बढ़ रही अब तक 208 सीटो पर बढ़त बना रखी है। वही भवानीपुर विधानसभा सीट से हुए मुकाबले में शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 15,105 वोटों से हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया है।
यह नतीजा बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि भवानीपुर सीट को ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में इस सीट पर मिली हार को तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका और भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस जीत के साथ शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल की सियासत में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली थी, इसलिए यह मुकाबला पूरे देश की नजरों में था।
नतीजे सामने आते ही भाजपा कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है, जबकि टीएमसी खेमे में मायूसी छा गई है। अब सबकी नजर ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया और आगे की राजनीतिक रणनीति पर टिकी है।
ब्यूरो। भागलपुर से नवगछिया को जोड़ने वाला बिहार का अहम लाइफलाइन पुल विक्रमशिला सेतु सोमवार तड़के बड़े हादसे का शिकार हो गया। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिलर नंबर 133 के पास स्लैब का एक हिस्सा अचानक ध्वस्त होकर गंगा नदी में गिर गया, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से पुल पर सभी तरह की आवाजाही रोक दी। राहत की बात यह रही कि प्रशासन की सतर्कता के कारण हादसे के वक्त उस हिस्से पर कोई वाहन मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा जान-माल का नुकसान टल गया।
कैसे हुआ हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, देर रात करीब 11:30 बजे के आसपास पिलर नंबर 133 में असामान्य हलचल देखी गई। इसके बाद पुलिस और स्थानीय अधिकारियों को सूचना दी गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुल पर ट्रैफिक तुरंत रोक दिया गया। कुछ ही देर बाद स्लैब का हिस्सा भरभराकर गंगा में समा गया।
उत्तर और दक्षिण बिहार का संपर्क बाधित
विक्रमशिला सेतु भागलपुर, नवगछिया, पूर्णिया, कटिहार और सीमांचल क्षेत्र को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। पुल बंद होने से हजारों यात्रियों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन ने फिलहाल यात्रियों को मुंगेर रूट से वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी है।
बड़ा सवाल: रखरखाव में लापरवाही?
गौरतलब है कि कुछ सप्ताह पहले भी पुल की संरचनात्मक स्थिति को लेकर सवाल उठे थे। उस समय अधिकारियों ने पुल को सुरक्षित बताया था, लेकिन ताजा हादसे ने रखरखाव और तकनीकी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंचकर जांच करेगी।
प्रशासन का बयान
जिला प्रशासन ने कहा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
जनता में नाराज़गी
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोग इसे प्रशासनिक लापरवाही और खराब रखरखाव का नतीजा बता रहे हैं।
रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री ने जनगणना 2027 में आदिवासी/सरना धर्म को अलग पहचान देने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने जनगणना में सरना धर्म कोड को पृथक श्रेणी के रूप में शामिल करने का आग्रह किया है।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि झारखंड समेत देशभर के आदिवासी समुदाय लंबे समय से सरना धर्म को अलग पहचान दिलाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जनगणना में अलग कोड मिलने से आदिवासी समाज की वास्तविक धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान दर्ज हो सकेगी।
पत्र में सीएम ने यह भी उल्लेख किया कि 2027 की जनगणना देश के विकास और नीतिगत निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में आदिवासी समाज की पहचान को सही तरीके से दर्ज करना आवश्यक है, ताकि भविष्य की योजनाएं तथ्यात्मक आंकड़ों के आधार पर बनाई जा सकें।
झारखंड सरकार पहले भी विधानसभा से इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज चुकी है। अब मुख्यमंत्री के इस पत्र के बाद एक बार फिर सरना धर्म कोड का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।
आदिवासी संगठनों ने मुख्यमंत्री के इस कदम का स्वागत करते हुए इसे समाज की सांस्कृतिक अस्मिता और अधिकारों की दिशा में अहम पहल बताया है।
